साइबर ठगों के लिए बैंक खाते खुलवाने वाले दो गिरफ्तार, 34 शिकायतों में 12.59 करोड़ की ठगी का खुलासा
दोस्तों और परिचितों के नाम से अलग-अलग बैंकों में खुलवाते थे खाते, साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराकर करते थे कमीशन की कमाई; मानसरोवर पुलिस की ‘ऑपरेशन मूल हंटर’ के तहत कार्रवाई
जयपुर। साइबर ठगी की रकम को खपाने के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क पर जयपुर पुलिस ने शिकंजा कसा है। मानसरोवर थाना पुलिस ने ‘ऑपरेशन मूल हंटर’ के तहत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी खुद के साथ-साथ अपने दोस्तों और परिचितों के नाम से अलग-अलग बैंकों में खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध करवाते थे। इन खातों के जरिए ठगी की रकम का लेन-देन किया जाता था।
मानसरोवर पुलिस थाना निरीक्षक सतीशचंद्र के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में अलग-अलग बैंकों के कई खाते, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड के फोटो मिले हैं। पुलिस ने इन बैंक खातों को साइबर क्राइम पुलिस पोर्टल 1930 पर सर्च किया तो इनके खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से जुड़ी 34 शिकायतें दर्ज मिलीं। इन शिकायतों में करीब 12 करोड़ 59 लाख 20 हजार 628 रुपये की ठगी की राशि से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार 27 सितंबर 2026 को पुलिस आयुक्त जयपुर के आदेश पर समन्वय पोर्टल पर दर्ज Mule Accounts, ATM Withdrawal, Cheque Withdrawal, Suspect POS, Suspect Bank Branch और Endpoints पर प्रभावी कार्रवाई के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी अभियान के दौरान मानसरोवर थाना पुलिस को संदिग्ध बैंक खातों के संबंध में जानकारी मिली।
जांच के दौरान पुलिस ने सचिन सिंह पुत्र लालन सिंह, निवासी गांव डागरा, थाना फतेहपुर सीकरी, जिला आगरा, उत्तर प्रदेश और सोनू मोटवानी पुत्र राजकुमार मोटवानी, निवासी मकान नंबर 42/29, सूर्यपुरी कॉलोनी, मानसरोवर, जयपुर दक्षिण को गिरफ्तार किया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। कई खाते उन्होंने अपने नाम से, जबकि कुछ खाते दोस्तों और परिचितों के नाम से खुलवाए। इन खातों को साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराया जाता था। बदले में आरोपियों को कथित तौर पर आर्थिक लाभ मिलता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों के नाम से खाते खुलवाए और इन खातों के जरिए कितनी रकम का लेन-देन हुआ।
मोबाइल ने खोली साइबर नेटवर्क की परतें
दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन का अवलोकन पुलिस के लिए अहम सुराग साबित हुआ। मोबाइल में विभिन्न बैंकों के खातों से संबंधित दस्तावेज, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड और एटीएम कार्ड के फोटो मिले। इसके बाद संबंधित बैंक खातों को साइबर क्राइम पुलिस पोर्टल पर जांचा गया। जांच में 34 शिकायतों का सामने आना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार इन शिकायतों में दर्ज कुल राशि 12.59 करोड़ रुपये से अधिक है। अलग-अलग राज्यों में दर्ज शिकायतों के कारण पुलिस अब इस नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और साइबर ठगी की रकम के वास्तविक संचालकों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है।
खाताधारकों से भी पूछताछ की तैयारी
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बैंक खाते किन साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए गए थे, खातों में आई रकम को आगे कहां ट्रांसफर किया गया और इस नेटवर्क में कितने लोग जुड़े हैं। साथ ही पुलिस उन अन्य खाताधारकों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिनके नाम से खाते खुलवाए गए थे।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन या अन्य बैंकिंग दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को उपलब्ध नहीं करवाएं। किसी दूसरे व्यक्ति के कहने पर अपने नाम से बैंक खाता खुलवाकर उसका इस्तेमाल किसी अन्य को करने देना भी साइबर ठगी के मामलों में परेशानी का कारण बन सकता है।