अगर आप भी इंटरनेट पर ‘गुमनाम’ रहकर कर रहे हैं ये काम, तो हो जाएं सावधान! पुलिस खंगाल रही है मोबाइल-लैपटॉप, दर्ज हो रही FIR

​जयपुर। इंटरनेट और सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Exploitation and Abuse Material – CSEAM) के ऑनलाइन प्रसार और शेयरिंग के खिलाफ राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम विंग ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा अभियान शुरू किया है। जयपुर स्थित पुलिस मुख्यालय (PHQ) में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) साइबर क्राइम वी.के. सिंह और पुलिस अधीक्षक (SP) सुमित मेहरड़ा ने इस राष्ट्रव्यापी डिजिटल कार्रवाई और इसके मॉड्यूस ऑपरेंडी (अपराध करने के तरीके) का विस्तृत खुलासा किया। ​एडीजी वी.के. सिंह ने बताया कि ऑनलाइन बाल यौन शोषण सामग्री के प्रसार पर राजस्थान पुलिस की पैनी नजर है। पुलिस की तकनीकी निगरानी, नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉयटेड चिल्ड्रेन (NCMEC) की टिपलाइन रिपोर्ट्स और डिजिटल ट्रेल के तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अब तक करीब 25,000 महत्वपूर्ण सूचनाएं/इनपुट प्राप्त हुए हैं।

​डिजिटल स्ट्राइक, 15,326 मोबाइल नंबर और 7,800 प्रोफाइल/URL पर ताला

​राजस्थान साइबर क्राइम विंग और राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की संयुक्त तकनीकी जांच के बाद विभिन्न सोशल मीडिया और कम्यूनिकेशन प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी कार्रवाई की गई है। कार्रवाई के तहत Instagram, Facebook, Snapchat, WhatsApp, Telegram एवं Discord जैसे प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय लगभग 7,800 URL और प्रोफाइल को ब्लॉक करवाया गया है। इस घिनौने अपराध में इस्तेमाल हो रहे 15,326 मोबाइल नंबरों की पहचान कर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (TSPs) के माध्यम से उन्हें हमेशा के लिए ब्लॉक करवाया गया है। साइबर अपराध में शामिल 100 से अधिक डिजिटल डिवाइसों को चिह्नित कर प्रतिबंधित किया गया है।

​अपराध का तरीका (Modus Operandi), गुप्त ग्रुप्स और क्लाउड स्टोरेज से खेल

​प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिकारियों ने खुलासा किया कि साइबर अपराधी अब पकड़ से बचने के लिए अत्यंत जटिल और गुप्त तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। अपराधी Telegram और Discord जैसे प्लेटफॉर्म्स पर गुप्त (Hidden) और पेड (Paid) चैनल्स या ग्रुप्स बनाते हैं। फर्जी एवं गुमनाम (Anonymous) पहचान के जरिए इन ग्रुप्स में सदस्यों को जोड़ा जाता है और फिर पर्सनल/प्राइवेट मैसेज (DM) द्वारा सामग्री का आदान-प्रदान किया जाता है। अपराधी शुरुआत में Instagram और Facebook जैसे सामान्य प्लेटफॉर्म्स पर कोडेड शब्दों (Code Words) और विशिष्ट हैशटैग्स के जरिए एक-दूसरे से संपर्क साधते हैं। इसके बाद बातचीत को कम निगरानी वाले ऐप्स (जैसे Telegram) पर ट्रांसफर कर दिया जाता है। सामग्री को सीधे भेजने के बजाय Google Drive या अन्य Cloud Storage प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड किया जाता है और ग्रुप्स में केवल एक्सेस लिंक साझा किए जाते हैं ताकि साइबर सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में न आएं।

​प्रदेश के विभिन्न जिलों में एफआईआर दर्ज, अंतरराज्यीय नेटवर्क पर भी शिकंजा

​NCMEC की टिपलाइन रिपोर्ट्स और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर राजस्थान पुलिस ने प्रदेश के कई जिलों में चिह्नित अपराधियों (Repeat Offenders) के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। चूरू, नागौर, अलवर, खैरथल-तिजारा, सीकर, हनुमानगढ़ और चित्तौड़गढ़ जिलों के संबंधित थानों में गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं।

​इसके साथ ही, राजस्थान पुलिस देश की अन्य राज्य पुलिस एजेंसियों के साथ भी निरंतर समन्वय स्थापित कर रही है। राजस्थान से बाहर सक्रिय ऐसे संदिग्धों की जानकारी संबंधित राज्यों को भेजी जा रही है ताकि पूरे देश में फैले इस नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके।

​राजस्थान पुलिस की आमजन और अभिभावकों के लिए सख्त चेतावनी व एडवाइजरी

​अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक वी.के. सिंह और एसपी सुमित मेहरड़ा ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि कोई व्यक्ति यह सोचता है कि वह इंटरनेट पर गुमनाम (Anonymous) रहकर या गुप्त ग्रुप का हिस्सा बनकर ऐसी सामग्री देख रहा है, डाउनलोड कर रहा है या शेयर कर रहा है, तो वह पूरी तरह गलतफहमी में है। राजस्थान पुलिस की तकनीकी टीमें हर डिजिटल गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

​कानूनी प्रावधान:

बाल यौन शोषण संबंधी सामग्री (CSEAM) को देखना, डाउनलोड करना, अपने पास रखना (Possession) या किसी अन्य के साथ शेयर करना पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।

​अभिभावकों के लिए सलाह:

​अपने बच्चों के मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट उपयोग पर नियमित रूप से ध्यान रखें। ​बच्चों को असुरक्षित ऑनलाइन गतिविधियों, अनजान ग्रुप्स और साइबर खतरों के प्रति जागरूक करें।

​सूचना देने के लिए हेल्पलाइन 1930 का करें उपयोग

​राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि उन्हें इंटरनेट, सोशल मीडिया या किसी ग्रुप पर इस प्रकार की कोई भी आपत्तिजनक सामग्री, लिंक या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है, तो तुरंत इसकी सूचना दें, ​

राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930, ​

राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल: https://cybercrime.gov.in

​ईमेल: sp.cybercrime@rajpolice.gov.in

​राजस्थान पुलिस बाल सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस प्रकार के घिनौने अपराधों के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर कार्य कर रही है।


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