क्या हुआ तेरा वादा… पीएचईडी मंत्री का पहला वादा ही फेल, ठेकेदारों में भारी आक्रोश

-ठेकेदारों को 2 दिन में 300 करोड़ के भुगतान का दिया था आश्वासन, लेकिन 6 दिन बाद भी हाथ खाली

जयपुर। राजस्थान के जलदाय विभाग (PHED) में “पैसे नहीं तो काम नहीं” के नारे के साथ शुरू हुआ आंदोलन अब एक नए मोड़ पर आ गया है। प्रदेश के पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी द्वारा आंदोलनरत ठेकेदारों से किया गया पहला ही वादा धराशायी हो गया है। 22 अप्रैल 2026 को हुई समझौता वार्ता के 6 दिन बीत जाने के बाद भी संवेदकों को “फूटी कौड़ी” का भुगतान नहीं मिला है, जिससे अब ठेकेदारों का धैर्य जवाब देने लगा है।
ऐसे में राजस्थान के जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में कार्यरत पंजीकृत संवेदकों के साथ सरकार की समझौता वार्ता अब विफल होती दिखाई दे रही है। ऑल राजस्थान PHED कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के बैनर तले गठित संघर्ष समिति ने सरकार पर धोखे का आरोप लगाया है। संवेदकों का कहना है कि जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी के साथ हुई वार्ता में मिले आश्वासनों के बावजूद, 6 दिन बीत जाने के बाद भी उनके खातों में एक रुपया तक नहीं आया है।

आंदोलन और समझौते की पृष्ठभूमि:-

अपनी 8 सूत्रीय मांगों और पिछले 33 महीनों से लंबित बकाया भुगतान को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदार 13 अप्रैल से 22 अप्रैल 2026 तक जल भवन मुख्यालय, जयपुर पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। इस दौरान ठेकेदारों ने “पैसे नहीं तो काम नहीं” का नारा बुलंद करते हुए प्रदेश की जल परियोजनाओं के संचालन और संधारण (Maintenance) को ठप करने की चेतावनी दी थी।

मंत्री के वे वादे जो अब तक हैं अधूरे:-

22 अप्रैल को आयोजित समझौता वार्ता में मंत्री महोदय ने मुख्य अभियंताओं की उपस्थिति में निम्नलिखित आश्वासन दिए थे:-

-2 दिनों के भीतर: 300 करोड़ का भुगतान किया जाएगा।

-05 मई 2026 तक: 1500 करोड़ का भुगतान कर दिया जाएगा।

-15 मई 2026 तक: समस्त बकाया राशि का पूर्ण भुगतान और मांगों का निस्तारण होगा।

कहीं ठेकेदारों की हड़ताल समाप्त करने की तो नहीं थी साजिश?:-

जलदाय भवन पर चल रहे उग्र आंदोलन को शांत करने के लिए जिस तेजी से समझौता वार्ता की गई और बड़े-बड़े आर्थिक वादे किए गए, वे अब संदेह के घेरे में हैं। 2 दिनों में 300 करोड़ देने का वादा 6 दिन बाद भी पूरा न होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन की मंशा वाकई भुगतान करने की थी या यह केवल रणनीतिक रूप से हड़ताल को टालने और धरना समाप्त करवाने की एक ‘साजिश’ थी? ठेकेदारों का आरोप है कि उन्हें केवल आश्वासन का झुनझुना थमाया गया है ताकि समय रहते आंदोलन को कुचला जा सके।

संघर्ष समिति की चेतावनी:-

संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश बिश्नोई ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को लिखे पत्र में स्पष्ट किया है कि संवेदकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। यदि शीघ्र ही भुगतान प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो भीषण गर्मी के इस दौर में जल परियोजनाओं का कार्य बंद करने के लिए वे बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी सरकार की होगी।
यह मुद्दा अब मुख्यमंत्री के साथ-साथ वित्त विभाग, मुख्य सचिव और सभी जिला कलेक्टरों तक पहुँच चुका है । संवेदक अब केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर भुगतान की मांग कर रहे हैं।

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