पंच गौरव योजना से बदलेगी गांवों की तस्वीर; 50 हजार किसानों को मिला प्रशिक्षण

जयपुर। राजस्थान के ढांचागत विकास, स्थानीय आजीविका और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के उद्देश्य से संचालित महत्वाकांक्षी ‘पंच गौरव योजना’ (Panch Gaurav Yojana) को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह मुस्तैद और एक्शन मोड में आ गई है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को शासन सचिवालय (Secretariat) के उच्च स्तरीय समिति कक्ष में संबंधित विभागों के आला अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण विधिक समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने योजना के पांचों मुख्य स्तंभों— “एक जिला-एक उत्पाद” (ODOP), “एक जिला-एक वनस्पति प्रजाति”, “एक जिला-एक खेल”, “एक जिला-एक पर्यटन स्थल” तथा “एक जिला-एक कृषि उपज” के तहत सभी जिलों में चल रहे कार्यों के भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों, बजटीय आवंटन, वर्तमान प्रगति और विधिक निगरानी प्रक्रिया (Monitoring Process) की सघन समीक्षा की।

मुख्य सचिव ने विभिन्न जिलों को आवंटित बजट और अब तक हुए वास्तविक व्यय का तुलनात्मक ऑडिट करते हुए अधिकारियों को कड़े प्रशासनिक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजटीय प्रावधानों के अनुसार सभी लंबित विधिक प्रस्ताव शीघ्र तैयार कर राज्य स्तरीय समिति को अनुमोदन हेतु भेजे जाएं, ताकि समयबद्ध रूप से प्रशासनिक स्वीकृतियां जारी कर धरातल पर कार्यों को और अधिक गति दी जा सके। उन्होंने रेखांकित किया कि पंच गौरव योजना राजस्थान की विशिष्ट पहचान, स्थानीय संसाधनों के संवर्धन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक युगांतकारी और महत्वपूर्ण पहल है।

पंच गौरव योजना की सांख्यिकीय प्रगति रिपोर्ट (वर्ष 2025-26)

बैठक के दौरान आयोजना सचिव रवि कुमार सुरपुर एवं अन्य विभागीय अधिकारियों द्वारा योजना के विभिन्न आयामों के तहत हासिल की गई विधिक व सांख्यिकीय उपलब्धियों का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया, जो इस प्रकार है:

  • एक जिला-एक कृषि उपज (ODOC): इस योजना के अंतर्गत राज्यभर में तकनीकी और उन्नत खेती को बढ़ावा देने के लिए 50 हजार से अधिक किसानों को विशेष विधिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया है।
  • एक जिला-एक वनस्पति प्रजाति: पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय वानिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रिकॉर्ड 85 लाख पौधों का वितरण और रोपण सुनिश्चित किया गया है।
  • एक जिला-एक उत्पाद (ODOP): स्थानीय हस्तशिल्प, एमएसएमई (MSME) और पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं सेमिनारों में 17 हजार से अधिक उद्यमियों व कामगारों ने सक्रिय विधिक भागीदारी की है।
  • एक जिला-एक खेल: प्रदेश में खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर पुनर्जीवित करने के लिए आयोजित जिला स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में 25 हजार से अधिक उभरते खिलाड़ियों ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
  • एक जिला-एक पर्यटन स्थल: मरुधरा की ऐतिहासिक विरासत को सहेजने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चयनित स्थलों पर 150 से अधिक सांस्कृतिक मेले, उत्सव, स्वच्छता अभियान एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं।

अंतर्विभागीय समन्वय पर मुख्य सचिव का जोर; धरातल पर योजना उतारने की डेडलाइन

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बैठक में उपस्थित सभी प्रशासनिक सचिवों को निर्देश दिए कि कोई भी विभाग इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत अलग-थलग होकर (Silos में) कार्य न करे। उन्होंने कृषि, उद्योग, खेल, वन और पर्यटन विभागों को एक संयुक्त विधिक और समन्वित कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए ताकि योजना के वास्तविक उद्देश्यों को और अधिक प्रभावी ढंग से ग्रामीण धरातल पर उतारा जा सके और विधिक रूप से भ्रष्टाचार या बजट की शिथिलता की कोई गुंजाइश न रहे।

इस महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में खेल विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रवीण गुप्ता, आयोजना विभाग के सचिव रवि कुमार सुरपुर सहित वित्त, पर्यटन, कृषि, उद्योग एवं वन विभागों के तमाम वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी और तकनीकी विंग के प्रतिनिधि मुस्तैदी से उपस्थित रहे।

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