शीर्षक: जयपुर नगर निगम में रिश्वतखोरी का खुलासा, ACB ने दो कर्मचारियों को ₹12,500 लेते रंगे हाथों पकड़ा

जयपुर (राजस्थान): राजस्थान की राजधानी जयपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विवाह पंजीकरण प्रक्रिया में कथित रिश्वतखोरी का भंडाफोड़ किया है। एसीबी की कोटा इकाई ने जयपुर नगर निगम के लाल कोठी कार्यालय में तैनात एक विवाह रजिस्ट्रार और एक नगर निगम कर्मचारी को ₹12,500 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

ACB के अनुसार यह कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। शिकायतकर्ता जयपुर के प्रताप नगर स्थित एक आर्य समाज मंदिर के प्रमुख थे, जहां गरीब, अनाथ और दहेज रहित विवाह नियमित रूप से संपन्न कराए जाते हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरकार द्वारा विवाह पंजीकरण के लिए निर्धारित ₹110 शुल्क के बावजूद, संबंधित कर्मचारी हर प्रमाण पत्र के लिए ₹2,500 से ₹3,000 तक की अवैध राशि की मांग कर रहे थे। जो लोग रिश्वत देने से इनकार करते थे, उन्हें दस्तावेजों में तकनीकी त्रुटियाँ बताकर बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाए जाते थे।

सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद ACB ने गोपनीय रूप से मामले का सत्यापन किया। जांच में आरोपों की पुष्टि के संकेत मिलने पर अधिकारियों ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।

छापे के दौरान विवाह रजिस्ट्रार विक्रम सिंह और नगर निगम कर्मचारी राकेश चौधरी को शिकायतकर्ता से ₹12,500 लेते हुए मौके पर ही पकड़ लिया गया। दोनों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

अतिरिक्त नकदी भी बरामद

गिरफ्तारी के बाद की गई तलाशी में कर्मचारी राकेश चौधरी के पास से ₹38,000 अतिरिक्त नकद भी बरामद हुआ। ACB इस बात की जांच कर रही है कि यह राशि वैध स्रोत से आई थी या अन्य अवैध वसूली से जुड़ी हुई है।

कई ठिकानों पर छापेमारी

ट्रैप कार्रवाई के बाद ACB टीमों ने आरोपियों से जुड़े आवास और अन्य ठिकानों पर भी तलाशी अभियान शुरू किया है। जांच एजेंसी दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

ACB ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि क्या यह मामला किसी बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क का हिस्सा है।

विवाह पंजीकरण व्यवस्था पर सवाल

इस घटना ने विवाह पंजीकरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सेवाओं में अनावश्यक देरी और रिश्वत की मांग आम नागरिकों, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है।

शिकायतकर्ता के अनुसार यह मामला विशेष रूप से उन गरीब और वंचित परिवारों से जुड़ा है जो सामाजिक सुधार और दहेज रहित विवाह को बढ़ावा देने के लिए इन सेवाओं का उपयोग करते हैं।

ACB का सख्त संदेश

राजस्थान ACB ने कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उसकी नीति पूरी तरह शून्य सहिष्णुता (zero tolerance) की है। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी सरकारी सेवा के लिए अवैध भुगतान न करें और ऐसी मांगों की तुरंत शिकायत करें।

जांच जारी

फिलहाल मामले की जांच जारी है और दोनों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे पेश किया जाएगा। ACB का कहना है कि सभी साक्ष्यों की जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।


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