चित्तौड़गढ़: प्रशासनिक सेवा की गरिमा और पारिवारिक रिश्तों के बीच का एक बेहद शर्मनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश कैडर के 2007 बैच के आईएएस अधिकारी अभय सिंह एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार उन पर आरोप लगाने वाली कोई और नहीं, बल्कि उनकी अपनी माँ रेखा सिंह हैं। माँ ने बेटे और बहू पर मकान पर कब्जा करने, मारपीट करने और भ्रष्टाचार का काला धन खपाने की गंभीर साजिश रचने का आरोप लगाया है।

2019 की CBI रेड और ’70 करोड़’ का रहस्य
पीड़िता रेखा सिंह का आरोप है कि वर्ष 2019 में जब बेटे अभय सिंह के आवास पर सीबीआई की रेड हुई थी, तो उसके बाद वह और उनकी पत्नी माधवी सिंह चित्तौड़गढ़ स्थित घर पहुँचे। शिकायत के अनुसार, उस समय दंपती दो बैगों में 70 करोड़ रुपये भरकर लाए थे। पीड़िता का दावा है कि प्रशासनिक सेवा में होने के कारण बेटे ने माँ को मोहरा बनाया और सारा काला धन उनके नाम पर बेनामी संपत्तियां खरीदने में खपाने की साजिश रची।
फर्जीवाड़ा और दस्तावेजों की लूट
रेखा सिंह ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने एक सुनियोजित आपराधिक साजिश रची:
- फर्जी रजिस्ट्री: मधुवन सेंती स्थित प्लॉट के लिए 9.9 लाख रुपये का चेक दिया गया, जिसका भुगतान कभी नहीं हुआ। आरोपियों ने उपपंजीयक कार्यालय के साथ मिलीभगत कर फर्जी विक्रेता और झूठे गवाहों के जरिए रजिस्ट्री करवा ली, जबकि वह प्लॉट किसी और का था।
- दस्तावेजों का अपहरण: जनवरी 2026 में दंपती ने चित्तौड़गढ़ आकर ताकत के बल पर माँ से जमीनों के सभी असली दस्तावेज लूट लिए और विरोध करने पर झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी।
- मानसिक प्रताड़ना: 1 जनवरी 2026 को अभय सिंह ने पत्नी के साथ मिलकर माँ के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए गए और धमकियों के चलते पीड़िता को खुद को कमरे में बंद करना पड़ा।
प्रशासनिक रसूख और न्याय की लड़ाई
रेखा सिंह ने मामले की शिकायत राजस्व परिषद के चेयरमैन से की है। इस पर राजस्व परिषद ने नियुक्ति विभाग (नियुक्ति विभाग) को पत्र भेजकर आईएएस अभय सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है। इससे पहले, पीड़िता ने स्थानीय सदर थाना और जिला पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत दी थी, लेकिन प्रशासनिक अधिकारी के रसूख के चलते पुलिस ने चुप्पी साधे रखी। अब पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिसके बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया तेज हो गई है।
इस मामले की पड़ताल जारी रखेगा। क्या एक लोक सेवक अपनी ही माँ के साथ इतना क्रूर हो सकता है? यह सवाल अब प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
