जयपुर। राजधानी के आराध्य देव ठाकुर श्री गोविंद देवजी मंदिर में 25 जून को ‘निर्जला एकादशी’ के पावन पर्व पर आस्था का जनसैलाब उमड़ेगा। भीषण गर्मी और रिकॉर्डतोड़ भीड़ के पूर्वानुमान को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए इस बार होली और देवउठनी एकादशी जैसा ‘सुपर क्राउड मैनेजमेंट’ प्लान लागू कर दिया है।
भक्तों को चिलचिलाती धूप में कतारों में न जूझना पड़े, इसके लिए झांकियों के समय में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए उनकी अवधि बढ़ा दी गई है।
जूता घर पूरी तरह बंद, लागू हुई ‘टू-लाइन शू पॉलिसी’
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन ने इस बार निशुल्क जूता घर को पूर्णतया बंद रखने का कड़ा फैसला लिया है। दर्शनार्थियों को प्रवेश के लिए दो अलग-अलग कतारों में बांटा जाएगा:
- नंगे पैर आने वाले भक्त: जो श्रद्धालु घर से ही नंगे पैर आएंगे, उन्हें मंदिर के मुख्य हॉल (छावन) के अंदर जाकर ठाकुरजी के दर्शन करने की अनुमति होगी।
- जूते पहनकर आने वाले भक्त: जो लोग जूते-चप्पल पहनकर आएंगे, वे मंदिर के बाहर बने विशेष रैंप से ही चलते हुए दर्शन करेंगे और सीधे बाहर निकल जाएंगे।
(यह व्यवस्था 25 जून को सुबह 4 बजे मंगला झांकी से लेकर रात को शयन झांकी तक सख्ती से लागू रहेगी।)
25 जून को झांकी दर्शन का नया व विस्तारित समय
भक्तों की सुविधा के लिए सबसे ज्यादा भीड़ वाली ‘मंगला’ और ‘धूप’ झांकी को मिलाकर सुबह साढ़े चार घंटे तक पट खोले रखे जाएंगे:
| झांकी का नाम | दर्शन का समय | कुल अवधि |
| मंगला | प्रातः 4:00 से 06:30 बजे तक | 2 घंटे 30 मिनट |
| धूप | प्रातः 7:00 से 09:00 बजे तक | 2 घंटे |
| शृंगार | प्रातः 9:30 से 10:15 बजे तक | 45 मिनट |
| राजभोग | प्रातः 10:45 से 11:15 बजे तक | 30 मिनट |
| जलयात्रा | प्रातः 11:15 से 11:45 बजे तक | 30 मिनट (विशेष फव्वारा दर्शन) |
| ग्वाल | सायं 4:30 से 05:15 बजे तक | 45 मिनट |
| संध्या | सायं 5:45 से 07:15 बजे तक | 1 घंटा 30 मिनट |
| शयन | रात्रि 7:45 से 08:15 बजे तक | 30 मिनट |
शीतल जलयात्रा झांकी: दोपहर 11:15 बजे होने वाली ‘जलयात्रा झांकी’ बेहद खास होगी। इसमें ठाकुर श्री गोविंद देवजी शीतल जल के फव्वारों के बीच बैठकर अपने भक्तों को अलौकिक दर्शन देंगे।
प्रशासन की सख्त अपील: साथ न लाएं ये सामान
सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार का बैग, थैला या लेडीज पर्स लाने की सख्त मनाही होगी। महिलाओं से विशेष अपील की गई है कि वे भीड़ में सोने-चांदी के कीमती आभूषण पहनकर न आएं।
- एंट्री-एग्जिट: सभी श्रद्धालुओं को ‘जलेब चौक’ के मुख्य द्वार से प्रवेश मिलेगा और निकासी ‘जय निवास उद्यान’ की तरफ से होगी।
- बुजुर्गों के लिए सलाह: अत्यधिक गर्मी और उमस को देखते हुए हृदय रोगी, अस्थमा के मरीज, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं से आग्रह किया गया है कि वे भीड़ से बचें और घर पर ही ठाकुरजी का ध्यान लगाएं।
आध्यात्मिक महत्व: क्यों खास है ‘निर्जला एकादशी’?
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को ‘निर्जला एकादशी’ कहा जाता है। सनातन धर्म में इसे वर्ष की सभी 24 एकादशियों में सबसे शिरोमणि माना गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति साल भर एकादशी का व्रत नहीं रख पाता, वह यदि केवल इस एक दिन बिना पानी पिए (निर्जल) उपवास रख ले, तो उसे पूरे वर्ष की एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त हो जाता है।
महाभारत से जुड़ा है ‘भीमसेनी एकादशी’ का रहस्य:
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि वेदव्यास जब पांडवों को एकादशी व्रत का महत्व समझा रहे थे, तब महाबली भीम ने कहा— “हे गुरुदेव! मेरे पेट में ‘वृक’ नामक अग्नि है, जिसके कारण मैं भूखा नहीं रह सकता। कृपया कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मुझे भूखा भी न रहना पड़े और एकादशी का फल भी मिल जाए।”
इस पर वेदव्यास जी ने भीमसेन को ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का ‘निर्जला व्रत’ करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन (द्वादशी) के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करनी चाहिए। भीम ने पूरे संयम के साथ इस कठिन व्रत का पालन किया, तभी से इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ या ‘पांडव एकादशी’ भी कहा जाने लगा।
व्रत का नियम: इस दिन सुबह ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए श्रीहरि विष्णु की पूजा की जाती है। व्रत का पारण अगले दिन 26 जून को स्नान के बाद जरूरतमंदों को जल से भरे घड़े (मटके), शर्बत, पंखे, वस्त्र और मौसमी फलों का दान करने के बाद ही किया जाता है।