अजमेर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में राजनीति विज्ञान के पदों के एक बार फिर बड़ी संख्या में खाली रहने के पूरे आसार बन गए हैं। प्राध्यापक (राजनीति विज्ञान) के 645 पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में 42,555 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी, लेकिन पात्रता जांच के लिए जारी विचारित सूची में मात्र 67 अभ्यर्थी ही क्वालिफाई कर पाए हैं। अंतिम दस्तावेज सत्यापन के बाद यह संख्या और भी कम हो सकती है।
परीक्षा के आंकड़े और आवेदन की स्थिति
- प्राध्यापक एवं कोच परीक्षा राजनीति विज्ञान-2025 के लिए कुल 75,256 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
- इनमें से 42,555 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 32,701 अनुपस्थित रहे (कुल उपस्थिति 56.55%)।
- प्रारंभिक विज्ञापन में राजनीति विज्ञान के 350 पद थे, जिन्हें जनवरी में बढ़ाकर 569 और जून में 645 कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद विचारित सूची में केवल 67 अभ्यर्थी ही जगह बना सके।
न्यूनतम अंक की अनिवार्यता बनी बड़ी बाधा
आयोग सचिव आशुतोष गुप्ता ने बताया कि भर्ती नियमों के अनुसार परीक्षा के प्रत्येक पेपर में न्यूनतम 40% अंक हासिल करना अनिवार्य है, जिसमें एससी-एसटी अभ्यर्थियों को 5% की छूट दी गई है। कुल 450 अंकों की दो पेपर की परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक की अनिवार्य शर्त के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अगले चरण तक नहीं पहुंच सके। इसके अलावा, ओएमआर उत्तर-पत्र में 10% से अधिक प्रश्नों में पांच विकल्पों में से कोई विकल्प नहीं भरने पर 227 अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया गया है, जिनके रोल नंबर अलग से जारी किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों (एक्सपर्ट व्यू) द्वारा बताए गए मुख्य कारण:
इस परीक्षा में अभ्यर्थियों के क्वालिफाई न कर पाने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
- आयोग द्वारा पेपर निर्माण में असंतुलन।
- अंग्रेजी प्रश्नों के हिंदी अनुवाद में गैर-व्यावहारिक शब्दों का प्रयोग।
- पाठ्यक्रम से अधिक तथ्यात्मक सवाल पूछा जाना।
- राजनीति विज्ञान का प्रश्न पत्र पिछली बार की अपेक्षा थोड़ा सरल था, लेकिन 40% अंक सभी अभ्यर्थी ला पाएं, ऐसी स्थिति नहीं थी।
- सामान्य ज्ञान का पेपर भी चुनौतीपूर्ण रहा, इस बार प्रथम प्रश्न पत्र ने भी अभ्यर्थियों को परेशान किया।