25 करोड़ की लूट पर जलदाय विभाग की मेहरबानी, 3 बार की जांच में भी नहीं फंसी ‘मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल’, रसूख के दम पर जनता के करोड़ों डकारे !
-घटिया पाइपों और फर्जी ई-वे बिलों से सरकार को लगाया करोड़ों का चूना
-इंजीनियरों और रसूखदारों का ‘सुरक्षा कवच’, मंत्री कार्यालय से लेकर आला अधिकारियों तक फर्म की सीधी पहुंच, जांच दल के निर्देश भी रद्दी की टोकरी में
जयपुर। जल जीवन मिशन (JJM) में भ्रष्टाचार के नए प्रतिमान स्थापित करने वाले संवेदक मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल के कारनामों की फेहरिस्त लम्बी होती जा रही है। उदयपुर संभाग के डूंगरपुर में 32 करोड़ के फर्जीवाड़े के बाद अब बांसवाड़ा के गढ़ी उपखंड की दर संविदा में 25 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में तीन बार उच्चस्तरीय जाँच हो चुकी है, लेकिन हर बार रिपोर्ट रद्दी की टोकरी में डाल दी गई और फर्म को बिना किसी कटौती के भुगतान कर दिया गया। उदयपुर संभाग के डूंगरपुर की सोम-कमला-अम्बा परियोजना में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े के बाद, ‘Expose Now’ अब संवेदक मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल के एक और बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा कर रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, बांसवाड़ा जिले के गढ़ी उपखंड में जल जीवन मिशन (JJM) के तहत हुए कार्यों में ठेका फर्म ने नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रूपए का फर्जीवाड़ा किया है।
गढ़ी उपखंड की दर संविदा में भ्रष्टाचार की परतें:-
जांच के दौरान कार्यालय अधिशाषी अभियंता, खंड बांसवाड़ा में उपलब्ध रिकॉर्ड और मौके के भौतिक निरीक्षण में दर्जनों गंभीर अनियमितताएं मिली, जिनमें ठेका फर्म मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता, सहायक अभियंता और अधिशाषी अभियंताओं की मिलीभगत ने न केवल फर्जीवाड़ा किया, बल्कि मिलीभगत से करोड़ों रूपए का फर्जी भुगतान भी उठा लिया गया:-

-ट्यूबवेल (T/W) की गहराई में ‘कागजी’ खेल:
ग्राम ‘सिंहारों का पाडा’ (Singharo Ka Parda) में जाँच दल ने ट्यूबवेल की वास्तविक गहराई मापी तो वह मात्र 97 मीटर मिली। चौंकाने वाली बात यह है कि माप पुस्तिका (MB) संख्या 1754 में इसे 120 मीटर दर्ज कर चतुर्थ रनिंग बिल के माध्यम से भुगतान भी उठा लिया गया। कनिष्ठ अभियंता द्वारा मौके पर माप लिए बिना केवल कागजों में गहराई बढ़ाकर सरकार को चूना लगाया गया।
-घटिया पाइपों का जाल:
मौके पर लगाए गए GI पाइपों का वजन निर्धारित मानकों से काफी कम पाया गया । IS Code के अनुसार 6 मीटर पाइप का वजन 30.60 kg होना चाहिए, लेकिन मौके पर यह मात्र 23.42 kg ही मिला।
-थर्ड पार्टी से पाइप खरीद का फर्जीवाड़ा:
अनुबंध की शर्तों के अनुसार पाइप सीधे निर्माताओं (Manufacturers) से खरीदे जाने थे। हालांकि, जांच में सामने आया कि संवेदक ने नियमों के विरुद्ध जाकर थर्ड पार्टी डीलरों (जैसे M/s ARVU Enterprises और M/s Desire Energy Solutions) के माध्यम से पाइप खरीदे हैं।
-बैक-डेटेड बिलों का इस्तेमाल:
जांच में पाया गया कि पाइप खरीद के इनवॉइस की तारीखें (18.03.2023 से 27.03.2023) दर संविदा कार्यादेश (21.04.2023) जारी होने से भी पहले की हैं। इसके अलावा, कुछ पाइपों की सप्लाई लोकेशन ई-वे बिल में डूंगरपुर आ रही है, जिससे उनके दोहरे भुगतान (Double Payment) की आशंका प्रबल हो गई है।
-खुदाई कार्य में फर्जीवाड़ा:
पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई में मौके पर केवल साधारण मिट्टी और बोल्डर मिले, जबकि माप पुस्तिका में ‘हार्ड रॉक’ (कठोर चट्टान) और ‘ब्लास्टिंग’ दर्ज कर अधिक भुगतान लिया गया है।
-एक ही ट्रेंच में दो पाइप, भुगतान अलग-अलग:
ग्राम ‘भानो का पाडा’ (Bhano Ka Parda) में पाया गया कि 100 MM DI और 90 MM HDPE पाइप एक ही ट्रेंच (खाई) में डाले गए हैं, लेकिन विभाग से इनके लिए अलग-अलग खुदाई का भुगतान प्राप्त कर लिया गया।
-निर्माण में तकनीकी खामियां:
उच्च जलाशयों (OHSR) के निर्माण में विभाग की मानक ड्राइंग का पालन नहीं किया गया है। इसके ‘बॉटम डोम’ पर ‘पडल कॉलर’ भी नहीं लगाए गए हैं।
ठेका फर्म पर कार्रवाई की जगह भुगतान कर किया पुरस्कृतः-
हैरानी की बात है कि मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल द्वारा गढ़ी उपखण्ड की दर संविदा में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार के एक नहीं बल्कि दर्जनों कारनामे किए गए, जिसका खुलासा जलदाय विभाग की ओर से कराई गई विभिन्न जांच रिपोर्ट में उजागर भी हो गया, लेकिन मजेदार बात देखो फर्म के इन फर्जीवाड़ों व भ्रष्टाचारों पर कार्रवाई करने की बजाए उसे पुरस्कृत करते हुए पूरा भुगतान कर दिया गया और आज दिनांक तक विभाग पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जो कि इस भ्रष्टाचार के खेल में जलदाय विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर करता है।
Expose Now करेगा इस घोटाले के हर राज का पर्दाफाशः-
भले ही तीन-तीन जांच रिपोर्टों को फाइलों के नीचे दबा दिया गया हो, भले ही फर्म को ऊंचे रसूख और राजनैतिक संरक्षण का ‘कवच’ प्राप्त हो, लेकिन ‘Expose Now’ की टीम ने यह ठाना है कि हम इस संगठित भ्रष्टाचार के हर खिलाड़ी के चेहरे से नकाब उतारकर रहेंगे। क्योंकि हम दबते नहीं, बल्कि हर उस सच को सामने लाते हैं जिसे ‘सिस्टम’ छुपाने की कोशिश करती है। हम बेनकाब करते हैं हर उस भ्रष्टाचार को जो सिस्टम को ‘दीमक’ की तरह चाट रहा है। इसीलिए तो हम हैं… ‘Expose Now’
बने रहें हमारे साथ… मैसर्स जगदीश प्रसाद अग्रवाल के घोटालों की अगली बड़ी सीरीज के लिए, जल्द ही सिर्फ Expose Now पर।
