अलवर: राजस्थान की भजनलाल सरकार में उस समय एक अनोखा और चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब सूबे के वन मंत्री संजय शर्मा अपने ही गृह जिले अलवर में प्रशासनिक अधिकारियों की हठधर्मिता से परेशान होकर उनके खिलाफ धरने पर बैठ गए। मंत्री के इस कदम से जिला प्रशासन और नगर निगम में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला?
अलवर नगर निगम में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला अब तूल पकड़ चुका है। वर्ष 2012 में हुई 329 सफाई कर्मचारियों की भर्ती के बाद से लंबे समय से नियुक्ति पत्र का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में बुधवार को वन मंत्री संजय शर्मा खुद नगर निगम परिसर पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।
कलेक्टर और अधिकारियों पर बरसे मंत्री
मंत्री संजय शर्मा ने जिला कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला और नगर निगम के अधिकारियों पर सीधा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों की गरीब सफाई कर्मचारियों को नौकरी देने की कोई मंशा ही नहीं है। मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका भी उन्हें लगातार गुमराह करते रहे हैं।
पात्र कर्मचारियों को नियुक्ति क्यों नहीं?
मंत्री संजय शर्मा ने सवाल उठाया कि आखिर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र क्यों नहीं दिए जा रहे हैं? उन्होंने बताया कि कभी उन्हें 100 अभ्यर्थी योग्य बताए गए, तो कभी 87 और कभी 69। लेकिन जब उन्होंने स्वायत्त शासन विभाग (DLB) से बात की, तो स्पष्ट हुआ कि 329 सफाई कर्मचारी पूरी तरह योग्य (Eligible) हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से नियुक्ति देने के स्पष्ट आदेश हो चुके हैं और उन्होंने खुद इस संबंध में कई बार पत्र लिखे हैं, इसके बावजूद अधिकारियों का रवैया लचर बना हुआ है।
अपने ही मंत्रियों के इस तरह धरने पर बैठने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली और अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं, और यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
