नई दिल्ली। सरकार के एक नए फैसले ने देश की सोलर इंडस्ट्री में भारी हड़कंप मचा दिया है। आगामी 1 जून से सोलर मॉड्यूल में केवल स्वदेशी सोलर सेल का इस्तेमाल अनिवार्य किए जाने से छोटे और मझोले (MSME) उद्योग गहरे संकट में आ गए हैं। इस नए नियम से विदेशी सेल पर निर्भर दर्जनों कंपनियों का कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
क्या है डीसीआर (DCR) नियम?
सरकार ने फैसला किया है कि 1 जून से ऐसे सोलर मॉड्यूल ही मान्य होंगे, जिनमें इस्तेमाल होने वाले सोलर सेल पूरी तरह से भारत में ही बने हों। इसे तकनीकी भाषा में डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) कहा जाता है। नियम लागू होने के बाद, विदेश से आए सोलर सेल (नॉन-DCR) लगाकर बनाए गए मॉड्यूल वाले सोलर प्रोजेक्ट्स को कमीशन (शुरू करने) की अनुमति नहीं मिलेगी।
क्या है उद्योग की मुख्य समस्या?
इस नए नियम से सोलर पैनल बनाने वाली छोटी और मध्यम दर्जे की कंपनियों (MSME) के सामने कच्चे माल (सोलर सेल) का भारी संकट खड़ा हो गया है।
- सीमित उत्पादन: भारत में अभी बहुत कम कंपनियां सोलर सेल बनाती हैं। देश में सिर्फ 5-6 बड़ी कंपनियां ही सेल मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं।
- आयात पर निर्भरता: दूसरी ओर, करीब 150 से ज्यादा छोटी और मध्यम कंपनियां पूरी तरह से आयातित (विदेशी) सेल पर निर्भर हैं।
- कच्चे माल की अनुपलब्धता: बड़ी कंपनियां भारत में जो सेल बनाती भी हैं, उसका अधिकांश हिस्सा वे खुद के ही बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल कर लेती हैं। ऐसे में छोटी कंपनियों को भारतीय सेल आसानी से नहीं मिल पाते।
- भारी निवेश की चुनौती: छोटी कंपनियों के लिए रातों-रात नई सोलर सेल फैक्ट्री लगाना भी संभव नहीं है, क्योंकि इसमें 400 से 500 करोड़ रुपये का बड़ा निवेश चाहिए होता है।
कीमतों में है जमीन-आसमान का अंतर
बाजार में डीसीआर (स्वदेशी) और नॉन-डीसीआर (विदेशी) मॉड्यूल की कीमतों में भारी अंतर है।
- डीसीआर मॉड्यूल की कीमत: लगभग 24 रुपये प्रति वाट।
- नॉन-डीसीआर मॉड्यूल की कीमत: लगभग 16 रुपये प्रति वाट (आधी कीमत पर उपलब्ध)। इस भारी मूल्य अंतर के कारण नियम लागू होने से प्रोजेक्ट्स की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि होना तय है।
उद्योगपतियों की अपील: नियम को एक साल आगे बढ़ाया जाए
इस गंभीर मुद्दे पर हाल ही में उद्योगपतियों, निवेशकों और सोलर पैनल निर्माताओं की एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में देशभर के करीब 300 से ज्यादा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सभी ने एक स्वर में सरकार से अपील की है कि डीसीआर नियम की अनिवार्यता को कम से कम एक साल के लिए आगे बढ़ा दिया जाए।
विशेषज्ञों की चेतावनी: सोलर सेक्टर से जुड़े वरिष्ठ विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि यह नियम अचानक लागू किया गया, तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गति रुक जाएगी। इससे 125 से ज्यादा सोलर मॉड्यूल निर्माता और 500 से ज्यादा सहायक (Ancillary) कंपनियों का कारोबार पूरी तरह से ठप हो सकता है।
उद्यमियों का स्पष्ट कहना है कि वे देश में घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के पूर्ण समर्थक हैं, लेकिन जब तक देश के भीतर भारतीय सेल की आसान और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक इसकी अनिवार्यता को थोपना उचित नहीं है। जबरन नियम लागू होने से न केवल व्यापार प्रभावित होगा, बल्कि देश के कई महत्वपूर्ण सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट भी बीच में ही अटक जाएंगे।
