जयपुर। साइबर ठगी के पैसों को बैंक खातों के जरिए इधर-उधर करवाकर कमीशन कमाने वाले एक आरोपी को जयपुर ग्रामीण पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मनोहरपुर थाना पुलिस ने करीब एक साल से फरार चल रहे ₹1000 के इनामी साइबर फ्रॉड आरोपी राधेश्याम गुर्जर को ग्राम चैच्यावाला की पहाड़ी में दबिश देकर गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में आरोपी के 14 बैंक खातों में पिछले दो वर्षों के दौरान करीब 11 से 12 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का खुलासा हुआ है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के बैंक खातों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में साइबर फ्रॉड से संबंधित 57 शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इन लेनदेन और शिकायतों के आधार पर साइबर ठगी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

साइबर अपराधियों को देता था बैंक खाते
पुलिस के अनुसार, आरोपी राधेश्याम गुर्जर साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते उपलब्ध करवाता था। साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन खातों में मंगवाई जाती थी और इसके बाद रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
इसके बदले आरोपी को प्रत्येक बैंक खाते के लिए करीब 50 हजार से 70 हजार रुपये तक कमीशन मिलता था। यानी आरोपी खुद सीधे ठगी करने के बजाय अपने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए करवाकर कमाई करता था।
पुलिस जांच में उसके बैंक खातों में साइबर फ्रॉड से जुड़ी 26,74,691 रुपये की राशि प्राप्त होने की जानकारी भी सामने आई है। वहीं, सभी 14 खातों में पिछले दो वर्षों के दौरान हुए कुल संदिग्ध लेनदेन की राशि करीब 11 से 12 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
ठगी की कमाई से खरीदी Thar, बाइक और ट्रैक्टर
पुलिस के मुताबिक साइबर अपराध से हासिल रकम से आरोपी ने महंगे वाहन भी खरीदे। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने महिन्द्रा Thar, TVS Apache मोटरसाइकिल और Massey DI ट्रैक्टर जब्त किए हैं।


जब्त वाहनों में—
- Mahindra Thar – RJ 52 CA 6677
- TVS Apache – RJ 52 SG 3506
- Massey DI Tractor – RJ 52 RA 5692
- शामिल हैं।
पुलिस ने आरोपी से जुड़े वाहन और संपत्ति के संबंध में जांच जारी रखी है। प्रेस नोट के अनुसार Thar की तलाश भी जारी है।
57 साइबर फ्रॉड शिकायतों से जुड़े बैंक खाते
पुलिस जांच में आरोपी के बैंक खातों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में साइबर फ्रॉड की 57 शिकायतें सामने आई हैं। इससे संकेत मिलता है कि आरोपी के बैंक खातों का इस्तेमाल केवल स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों द्वारा भी किया जा रहा था।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों में आई रकम किन-किन साइबर ठगी की घटनाओं से संबंधित थी और रकम को आगे किन बैंक खातों या व्यक्तियों तक भेजा गया।
सात मामलों में वांछित था आरोपी
राधेश्याम गुर्जर के खिलाफ अलग-अलग स्थानों पर मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार आरोपी कुल सात प्रकरणों में वांछित चल रहा था।
इन मामलों का संबंध दिल्ली स्पेशल सेल, कोटपूतली साइबर थाना, छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर साइबर थाना, जयपुर आयुक्तालय साइबर थाना, मंगलीपुरा दिल्ली, कामां थाना डीग और भरतपुर साइबर थाना से बताया गया है।
इससे साफ है कि आरोपी के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मामले अलग-अलग राज्यों और जिलों में सामने आ चुके थे और वह करीब एक साल से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था।
पहाड़ी में छिपकर रह रहा था आरोपी
जयपुर ग्रामीण पुलिस की ओर से साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत मनोहरपुर थाना पुलिस आरोपी की तलाश कर रही थी। पुलिस टीम ने तकनीकी जानकारी और अन्य इनपुट के आधार पर आरोपी की लोकेशन का पता लगाया।
पुलिस को सूचना मिली कि राधेश्याम गुर्जर ग्राम चैच्यावाला की पहाड़ी में छिपकर रह रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
अब साइबर नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य फोकस उसके 14 बैंक खातों में हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन, 57 साइबर फ्रॉड शिकायतों और अलग-अलग राज्यों में दर्ज मामलों के बीच संबंध तलाशने पर है।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी को बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए किन लोगों ने संपर्क किया था, साइबर ठगी की रकम उसके खातों में किस माध्यम से पहुंचती थी और रकम को आगे किन खातों में ट्रांसफर किया जाता था।
पूछताछ में यह भी सामने आने की संभावना है कि इस नेटवर्क में आरोपी के अलावा और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा उसके जरिए कितने बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया गया।
पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जांच के आधार पर साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क, रकम के रूट और अन्य संदिग्ध बैंक खातों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।