जयपुर: Expose Now ने राजस्थान पुलिस महकमे में चतुर्थ श्रेणी (4th Class) के नवचयनित कर्मचारियों के साथ हो रही प्रशासनिक लापरवाही की एक और बड़ी परत खोली है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा भले ही हाल ही में काउंसलिंग और ज्वाइनिंग को लेकर कुछ कदम उठाए गए हों, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के पीछे छिपी दास्तां युवाओं के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
क्या है पूरा मामला और इतिहास?

- पुरानी विज्ञप्तियों का आधार: राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा 18 दिसंबर 2017 को चतुर्थ श्रेणी के पदों (कुक/लांगरी और स्वीपर) के लिए विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त स्कूल से 5वीं पास और संबंधित कार्य (खाना बनाने या साफ-सफाई) का अनुभव मांगा गया था। इसके पश्चात, 14 नवंबर 2022 को राज्य विशेष शाखा, जयपुर द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियम 1999 के प्रावधानों के तहत कैनल-बॉय (कुल 08 पद) के लिए सीधी भर्ती निकाली गई, जिसकी योग्यता भी 5वीं पास ही थी।

- अगस्त 2026 में आवंटन और ज्वाइनिंग का पेंच: हाल ही में अगस्त 2026 में राजस्थान पुलिस महकमे को 612 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आवंटित तो हुए, लेकिन उन्हें समय पर ज्वाइनिंग नहीं दी गई। अन्य विभागों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ज्वाइनिंग के बाद वेतन तक मिलने लगा, जबकि पुलिस महकमा इन युवाओं को यह कहकर पीएचक्यू (PHQ) के चक्कर कटवाता रहा कि हमने पदों का विवरण भेज दिया है, बाकी प्रशासनिक सुधार विभाग (ARD) जाकर पता करो।
अधिकारियों की सुस्ती और ‘Expose Now‘ की पड़ताल
‘Expose Now‘ की पड़ताल में सामने आया कि अगस्त 2026 में तत्कालीन भर्ती बोर्ड अध्यक्ष दिनेश कुमार अग्रवाल ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पदों के विवरण और ज्वाइनिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उस समय के ARD प्रमुख राजेश जोशी (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) से मुलाकात की थी। राजेश जोशी ने सुझाव दिया था कि इन कर्मचारियों को सीधे स्वीपर या कुक नहीं बनाया जा सकता, इसलिए विभाग में ‘शैडो पोस्ट’ (Shadow Post) बनाई जाए और इन्हें ज्वाइनिंग देने पर विचार किया जाए।
इसके अलावा, जब ‘Expose Now‘ ने खुद पीएचक्यू में वर्तमान भर्ती चयन बोर्ड के अध्यक्ष मनोज चौधरी से भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल किया, तो उनका जवाब बेहद हैरान करने वाला था—उनका कहना था कि “मेरे पास टाइम नहीं है।”
काउंसलिंग और आधा-अधूरा समाधान
विभाग द्वारा अब 24 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत 353 अभ्यर्थियों की काउंसलिंग की तिथि 6 अक्टूबर से 9 अक्टूबर तक तय कर दी गई है। वहीं, बाकी बचे 295 अभ्यर्थियों की सूची वापस ARD को भेज दी गई है ताकि उन्हें नए विभाग आवंटित किए जा सकें।
खड़े होते गंभीर सवाल:
- योग्यता और काम का विरोधाभास: जब विभाग खुद विज्ञप्ति में स्पष्ट लिख रहा है कि भर्ती 5वीं पास और कार्य अनुभव वालों के लिए है, तो 10वीं-12वीं पास उच्च शिक्षित युवाओं को स्वीपर या कुक कैसे बनाया जा सकता है?
- सुझावों पर अनदेखी: जब पूर्व बोर्ड अध्यक्ष ने शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप पद सृजित करने (Shadow Post) की बात कही थी, तो नए बोर्ड अध्यक्ष ने इस ओर ध्यान क्यों नहीं दिया?
- सिस्टम और युवाओं के बीच भरोसे की जंग: यदि विभाग के पास पद कम थे, तो सभी बचे हुए अभ्यर्थियों को पहले ही ARD वापस भेज देना चाहिए था ताकि उन्हें उनकी योग्यता के अनुरूप कोई दूसरा विभाग मिल जाता पर ऐसा किया नहीं गया क्यों? ये अभ्यर्थी सफाईकर्मी नहीं, बल्कि चतुर्थ श्रेणी कर्मी बनने के लिए दिन-रात मेहनत कर परीक्षा पास करके ज्वाइनिंग की आस देख रहे हैं।
जब नियम सुविधा के अनुसार कभी भी बदले या तोड़े जा सकते हैं, तो किसी भी अभ्यर्थी और शासन-प्रशासन के बीच विश्वास कैसे बन पाएगा? ‘Expose Now’ इस मामले की हर अपडेट पर पैनी नजर बनाए रखेगा।