-कैग (CAG) की रिपोर्ट से बड़ा पर्दाफाश: बच्चों और बेटियों की 30 योजनाओं में 2 साल तक नहीं फूटी एक भी पाई, विधानसभा में खुली सिस्टम की पोल।
-स्कूटी, छात्रवृत्ति और सुरक्षा सिर्फ नारों में सीमित: 21.61 करोड़ की अल्पसंख्यक और 62.6 करोड़ की कॉलेज स्कूटी योजना ठप; RTE की फीस भरपाई तक रोकी।
-लापरवाही या संवेदनहीनता? 153 करोड़ की महिला कल्याण योजनाओं में भी खर्च शून्य; बजट जारी होने के बावजूद क्यों नहीं निकला एक भी रुपया?
जयपुर। कागजों पर करोड़ों के बजट का ढोल पीटना और धरातल पर जरूरतमंदों को ठेंगा दिखाना—यह सरकारी तंत्र की पुरानी फितरत रही है। लेकिन इस बार जो खुलासा हुआ है, वह सिर्फ प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि प्रदेश के 1 करोड़ मासूम बच्चों, होनहार छात्राओं और बेसहारा महिलाओं के भविष्य के साथ हुआ सबसे बड़ा ‘सिस्टमेटिक विश्वासघात’ है।
विधानसभा के पटल पर रखी गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने सरकारी दावों के परखच्चे उड़ा दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों, बालिकाओं और महिलाओं के लिए जारी किए गए करीब 3,000 करोड़ के बजट में से दर्जनों अहम योजनाओं में पिछले 2 वर्षों के दौरान खर्च का आंकड़ा ‘00’ (शून्य) रहा है।
Expose Now डेटा, जहां बजट तो मिला, लेकिन खर्च रहा ZERO:-
‘Expose Now’ की टीम ने कैग रिपोर्ट के पन्नों को खंगाला, तो सामने आया कि शिक्षा, छात्रवृत्ति, बाल पोषण और महिला सुरक्षा से जुड़ी 37 में से 21 बाल योजनाओं और महिलाओं की सभी 9 बड़ी योजनाओं में फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं की गई।
- बेटियों के सपनों पर ब्रेक (स्कूटी व उच्च शिक्षा योजनाएं):
-कालीबाई भील कॉलेज स्कूटी योजना: 62.60 करोड़ का बजट — खर्च 00
-कालीबाई भील स्कूटी (सोशल जस्टिस विभाग): 50.00 करोड़ का बजट — खर्च 00
-कालीबाई भील स्कूटी (अल्पसंख्यक विभाग): 21.61 करोड़ का बजट — खर्च 00
- गरीब, शोषित और होनहार छात्रों के हक पर डाका:
-ओबीसी (OBC) छात्रों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: 56.54 करोड़ — खर्च 00
-RTE के तहत निजी स्कूलों की फीस भरपाई: 55.31 करोड़ — खर्च 00
-आर्थिक पिछड़ा छात्र (EWS) पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति: 5.50 करोड़ — खर्च 00
-सहरिया छात्रों को आर्थिक सहायता: 2.55 करोड़ — खर्च 00
-राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा: 80 लाख — खर्च 00
-SC वर्ग के लिए बुक बैंक योजना: 12 लाख — खर्च 00
- महिला सुरक्षा और बेसहारा संबल योजनाएं कागजों में दफन:
-परित्यक्ता महिला पेंशन योजना: 50.00 करोड़ — खर्च 00
-लाडली सुरक्षा योजना: 20.00 करोड़ — खर्च 00
-महिला निधि सहकारी ऋण योजना: 20.00 करोड़ — खर्च 00
-मां-बाड़ी केंद्र निर्माण व क्रैच आंगनबाड़ी रखरखाव: 20.33 करोड़ — खर्च 00
-छात्रावासों में सोलर लाइट और शुद्ध पेयजल: 8.15 करोड़ — खर्च 00
Expose Now के 5 तीखे सवाल — जवाब दे जिम्मेदार तंत्र:
-जब बजट स्वीकृत था, तो 2 साल तक फाइलें दबाकर क्यों बैठे रहे अफसर?
-क्या RTE फीस भरपाई का पैसा न देने से गरीब बच्चों के दाखिलों पर संकट पैदा नहीं हुआ?
-दूर-दराज कॉलेज जाने वाली बेटियों की स्कूटी का पैसा ट्रेजरी में रोककर कौन सा विकास रचा जा रहा था?
-परित्यक्ता महिलाओं और बेसहारा बच्चों के पोषण का पैसा अटकाने वाले अफसरों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई?
-क्या लोक-लुभावन घोषणाएं सिर्फ चुनावी पोस्टर चमकाने के लिए की जाती हैं?
घोषणाएं सुपरहिट, धरातल पर सुपरफ्लॉप:-
सरकारी मंचों से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘कल्याणकारी राज्य’ के भाषण देना बेहद आसान है, लेकिन जब हजारों करोड़ का बजट बैंक खातों और सरकारी तिजोरियों में धूल फांकता रह जाए और एक होनहार छात्रा स्कूटी या छात्रवृत्ति के अभाव में पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाए, तो यह तंत्र की ‘आपराधिक लापरवाही’ बन जाती है। कैग की इस रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि समस्या संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि नौकरशाही की संवेदनहीनता और लचर इच्छाशक्ति है। अब देखना यह होगा कि विधानसभा में खुली इस पोल के बाद क्या लापरवाह अफसरों की जवाबदेही तय होगी या फिर यह रिपोर्ट भी लालफीते में बांधकर फाइलों के किसी अंधेरे कोने में दबा दी जाएगी?
सच्चाई के साथ, बेखौफ आवाज — ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now