ब्यावर: आंगनवाड़ी रिनोवेशन में खाकी की ‘कमी कमीशनबाजी’, CDPO और AEN ने बुना रिश्वत का जाल, फिर क्या हुआ?

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ब्यावर जिले के रायपुर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्यवाही को अंजाम देते हुए सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की परतों को उधेड़ कर रख दिया है । यह मामला आंगनवाड़ी केंद्रों के रिनोवेशन बिल पास करने के बदले मांगी गई लाखों रुपये की रिश्वत से जुड़ा है, जहाँ एक ठेकेदार को अपने ही हक के पैसे के लिए भ्रष्ट अधिकारियों की ‘फीस’ चुकानी पड़ रही थी

आंगनवाड़ी रिनोवेशन और ‘मोटा कमीशन’ की डिमांड

यह पूरी कहानी ‘विनायक एंटरप्राइजेज’ के प्रोपराइटर मुकेश मजुमदार की शिकायत से शुरू होती है । मुकेश की फर्म ने रायपुर और बदनोर ब्लॉक में कुल 11 आंगनवाड़ी केंद्रों के रिनोवेशन का काम पूरा किया था । मुकेश का आरोप है कि करीब 12 लाख रुपये के बिलों के भुगतान और माप पुस्तिका (MB) भरने के बदले CDPO मनीष मीणा ने 2 लाख 30 हजार रुपये और AEN प्रदीप कुमार ने 21 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी । अधिकारियों ने साफ़ कर दिया था कि बिना पैसे दिए बिल पास नहीं होंगे

अजमेर की सड़कों पर ‘कार राइड’ और घूस का सौदा

रिश्वत की इस मांग का सत्यापन करने के लिए एसीबी ने एक गोपनीय योजना बनाई । इस दौरान CDPO मनीष मीणा ने परिवादी को अजमेर बुलाया और अपनी कार में घुमाते हुए रिश्वत की राशि कम करके 1 लाख 80 हजार रुपये तय की । इतना ही नहीं, शातिर अधिकारी ने पैसे सीधे न लेकर अपने ड्राइवर दिलखुश के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर करने का दबाव भी बनाया

सस्पेंस भरा ‘ट्रैप’ और सरकारी क्वार्टर पर एक्शन

एसीबी की टीम ने जब जाल बिछाया, तो मामला और भी दिलचस्प हो गया। सीडीपीओ मनीष मीणा को शायद कार्यवाही की भनक लग गई थी, इसलिए उसने परिवादी का मोबाइल नंबर ही ब्लैकलिस्ट कर दिया, जिससे उसके खिलाफ ट्रैप सफल नहीं हो सका । लेकिन एसीबी ने रायपुर पंचायत समिति के सहायक अभियंता (AEN) प्रदीप कुमार पर अपना ध्यान केंद्रित किया

16 मार्च 2026 को एईएन प्रदीप कुमार ने परिवादी को रायपुर स्थित अपने सरकारी क्वार्टर नंबर 08 पर बुलाया । परिवादी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 15 हजार रुपये लेकर वहां पहुंचा । जैसे ही रिश्वत का लेन-देन हुआ, एसीबी की टीम ने उसे दबोच लिया

गिरफ्तारी और बरामदगी

एसीबी की टीम ने एईएन प्रदीप कुमार को 15 हजार रुपये की रिश्वत के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया । तलाशी के दौरान उनके क्वार्टर से 5 लाख 23 हजार रुपये की अन्य संदिग्ध अवैध राशि भी बरामद की गई । फिलहाल एसीबी ने प्रदीप कुमार और मनीष मीणा दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है

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