Expose Now भ्रष्टाचार का लाइव ‘एक्सपोज’: अमृत 2.0 योजना में बड़ा घोटाला, PHED अफसरों की सेटिंग फेल, नेशनल टेस्ट हाउस की जांच ने खोली भ्रष्टाचार की पोल!

-99 लाख की कीमत के सभी 8 साइज के पाइप जांच में फेल, PHED अफसरों की मिलीभगत हुई उजागर

-जिन पाइपों को ‘साहबों’ ने दी थी हरी झंडी, वो 22 हजार मीटर पाइप नेशनल लैब की जांच में निकले घटिया

-अमृत 2.0 योजना में इंजीनियर्स की मिलीभगत व भ्रष्टाचार से अब महीनों लटकेगा काम!

जयपुर/सीकर। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत 2.0’ योजना में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर संदेह के घेरे में आ गई है। रामगढ़ शेखावाटी क्षेत्र में जलापूर्ति योजना के लिए मंगवाई गई 22 हजार 325 मीटर लंबी एचडीपीई (HDPE) पाइपें नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) की जांच में पूरी तरह फेल साबित हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 99 लाख रुपए की लागत वाली इन घटिया पाइपों को विभाग के ही उच्च अधिकारियों ने सप्लाई से पहले हरी झंडी दी थी। इस खुलासे के बाद अब पीएचईडी के इंजीनियरों और सप्लायर कंपनी के बीच गहरी सांठगांठ के आरोप लग रहे हैं।

अधिकारियों ने दफ्तर में बैठकर ही तैयार कर दी थी ‘सकारात्मक’ रिपोर्ट:-

मिली जानकारी के अनुसार, हैदराबाद की स्टैंडर्ड इन्फ्राटेक कंपनी द्वारा खाटूश्यामजी, लोसल, रींगस, खंडेला, फतेहपुर और रामगढ़ शेखावाटी क्षेत्रों में जलापूर्ति और रखरखाव का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य के लिए कंपनी ने जयपुर की कादंबरी इंडस्ट्रीज से आठ अलग-अलग आकारों की पाइपें खरीदी थीं। नियमों के मुताबिक सप्लाई से पहले पीएचईडी सीकर के अधिशासी अभियंता (XEN) रामकुमार चाहिल और एईएन (AEN) सागरमल ने इसी साल फरवरी में इसका ‘प्री-डिस्पैच निरीक्षण’ किया था और पाइपों को बिल्कुल सही घोषित किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि जो पाइपें NTH जैसी राष्ट्रीय स्तर की जांच में फेल हो गईं, उन्हें इन अधिकारियों ने कैसे पास कर दिया? क्या अधिकारियों ने वास्तव में मौके पर जाकर जांच की थी या फिर बंद कमरों में बैठकर ही भ्रष्टाचार का खेल खेलते हुए हरी झंडी दे दी गई?

वापस लौटाई जाएंगी पाइपें, जनता की जलापूर्ति योजना में होगी देरी:-

NTH की रिपोर्ट में पाइपों के रिजेक्ट होने के बाद अब संबंधित फर्म इन घटिया पाइपों को वापस कादंबरी इंडस्ट्रीज को लौटाने की तैयारी कर रही है, जिसके लिए विभाग से अनुमति मांगी गई है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के कारण रामगढ़ शेखावाटी और आसपास के क्षेत्रों में चल रहा काम पूरी तरह ठप हो जाएगा। नई फर्म से दोबारा पाइपें मंगवाने, उनका निरीक्षण करने और सप्लाई करने की लंबी प्रक्रिया में महीनों का समय लगेगा। ऐसे में घटिया सामग्री के इस खेल की वजह से जनता को मिलने वाले पानी की योजना में जो देरी होगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा?

प्री डिस्पेच निरीक्षण के पाइप क्वालिटी के, सप्लाई घटिया क्वालिटी के:-

दरअसल कंपनियों द्वारा विभागीय निरीक्षण के दौरान पूरे मापदण्डों के अनुसार अच्छी क्वालिटी के पाइपों का निरीक्षण कराया जाता है। इसके बाद पीएचईडी इंजीनियर्स की मिलीभगत से घटिया क्वालिटी के पाइप तैयार कर उनकी सप्लाई की जाती है। पाइप कंपनियों द्वारा ये पाइप ठेकेदार की डिमाण्ड और रेट के अनुसार तैयार किए जाते हैं। ये घटिया क्वालिटी के पाइप विभागीय इंजीनियर्स की मिलीभगत से पेयजल योजनाओं में खपा दिए जाते हैं और ठेकेदारों को मोटा फायदा होने के साथ ही इंजीनियर्स को भी मोटा कमीशन मिल जाता है।

PHED के जिम्मेदार अफसरों की सफाई:-

इस पूरे मामले में जब पीएचईडी सीकर के अधिकारी रामकुमार चाहिल से बात की गई तो उन्होंने अजीबोगरीब सफाई देते हुए कहा, “प्री-डिस्पैच निरीक्षण के समय पाइप सही थीं, पता नहीं NTH की जांच में कैसे फेल हो गईं। हालांकि इन पाइपों का अभी इस्तेमाल नहीं किया गया है और इनकी दोबारा जांच करवाई जाएगी, जिससे सच सामने आ सके।”

Expose Now के सुलगते सवाल:

-जब अधिकारियों ने खुद जांच की थी, तो 8 अलग-अलग आकार की सभी पाइपें एक साथ कैसे फेल हो गईं?

-क्या इस सुस्त कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के पीछे पीएचईडी के बड़े अधिकारियों की कंपनी के साथ मिलीभगत नहीं है?

-जनता के पैसे और समय की बर्बादी करने वाले इन लापरवाह अफसरों पर सरकार कब सख्त कार्रवाई करेगी?

ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now


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