अलवर-भरतपुर की प्यास बुझाने वाली चंबल पेयजल परियोजना अटकी, लाखों लोगों को राहत मिलने में बढ़ी देरी

अलवर। राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिलों की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या के समाधान के लिए प्रस्तावित चंबल पेयजल परियोजना एक बार फिर देरी का शिकार हो गई है। हजारों करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद जमीन पर काम शुरू नहीं हो पाने से दोनों जिलों के लाखों लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

राज्य सरकार ने परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हाल ही में विभिन्न पैकेजों के तहत नए टेंडर जारी किए हैं, लेकिन प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण योजना की गति धीमी बनी हुई है।

पेयजल संकट से जूझ रहे हैं अलवर और भरतपुर

अलवर और भरतपुर जिले लंबे समय से भूजल स्तर में गिरावट और फ्लोराइड युक्त पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। गर्मियों के दौरान कई कस्बों और ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट और गहरा जाता है।

चंबल नदी से पानी लाकर इन जिलों तक पहुंचाने की योजना को स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है। परियोजना के पूरा होने के बाद लाखों लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

क्या है चंबल-अलवर-भरतपुर पेयजल परियोजना?

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की इस परियोजना के तहत चंबल नदी से पानी लेकर पाइपलाइन और जलाशयों के जरिए अलवर और भरतपुर के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

परियोजना को हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जा रहा है। इसके पहले चरण में इंटेक वेल, जल शोधन संयंत्र (WTP), पंपिंग स्टेशन, कच्चे पानी के जलाशय और लंबी पाइपलाइन नेटवर्क का निर्माण किया जाना है। निर्माण अवधि 36 माह निर्धारित की गई है, जबकि 10 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी ठेकेदार एजेंसी के पास रहेगी।

टेंडर प्रक्रिया के बावजूद क्यों अटका काम?

सूत्रों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरियां, तकनीकी स्वीकृतियां और वित्तीय प्रक्रियाओं के कारण परियोजना निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रही है।

हालांकि, राज्य सरकार ने वर्ष 2025 और 2026 के दौरान परियोजना के अलग-अलग पैकेजों के लिए नए टेंडर जारी किए हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्य पूरी गति नहीं पकड़ पाया है।

पूर्वी राजस्थान के लिए अहम है परियोजना

चंबल पेयजल परियोजना को राज्य सरकार की पूर्वी राजस्थान जल प्रबंधन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यह परियोजना संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (PKC-ERCP) योजना से भी जुड़ी हुई है, जिसका उद्देश्य पूर्वी राजस्थान के जल संकटग्रस्त जिलों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना है।

सरकार का दावा है कि इस व्यापक योजना से अलवर, भरतपुर, दौसा, करौली और सवाई माधोपुर सहित 17 जिलों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

लोगों को जल्द शुरू होने का इंतजार

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि हर वर्ष गर्मियों में पेयजल संकट गंभीर रूप ले लेता है। ऐसे में चंबल पेयजल परियोजना से लोगों को काफी उम्मीदें हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजना को तय समयसीमा में पूरा किया जाता है, तो इससे न केवल पेयजल संकट दूर होगा, बल्कि भूजल दोहन पर भी निर्भरता कम होगी।

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