राजस्थान के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए नया वित्त वर्ष खुशियों वाली खबर लेकर आया है। राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग (RERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एआरआर (ARR) और टैरिफ आदेश जारी कर दिया है, जिसमें खुदरा उपभोक्ताओं (Retail Consumers) के लिए बिजली की दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है । जहाँ एक ओर अन्य सेवाएं महंगी हो रही हैं, वहीं बिजली के मोर्चे पर राहत बरकरार रखकर आयोग ने आम जनता को बड़ी राहत दी है।
डिस्कॉम की वित्तीय सेहत में सुधार: मुनाफे में आई कंपनियां
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, प्रदेश की तीनों डिस्कॉम्स (जयपुर, अजमेर और जोधपुर) की वित्तीय स्थिति में सकारात्मक सुधार देखा गया है:
- शुद्ध अधिशेष (Surplus): वित्त वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में डिस्कॉम्स के पास 414 करोड़ रुपये का शुद्ध अधिशेष आंका गया है ।
- भावी अनुमान: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 75,524 करोड़ रुपये का एआरआर निर्धारित किया गया है, जिसमें 1,753 करोड़ रुपये के शुद्ध अधिशेष का अनुमान है ।
- घटता कर्ज: डिस्कॉम्स का कुल अपोषित अंतर (Unfunded Gap), जो मार्च 2024 तक 49,842 करोड़ रुपये था, वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक घटकर 33,298 करोड़ रुपये होने की संभावना है ।
उद्योगों और EV सेक्टर को मिली बड़ी ‘पावर’
आयोग ने टैरिफ को तर्कसंगत बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलावों को मंजूरी दी है, जिनका सीधा लाभ व्यापार और भविष्य की तकनीक को मिलेगा:
- औद्योगिक राहत: मध्यम औद्योगिक सेवा (MP/HT-3) के लिए न्यूनतम ऊर्जा शुल्क 6.30 रुपये प्रति यूनिट से घटाकर 6.00 रुपये कर दिया गया है ।
- EV चार्जिंग स्टेशन: इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों को बढ़ावा देने के लिए अब फिक्स्ड चार्ज हटा दिया गया है और सिंगल-पार्ट टैरिफ की शुरुआत की गई है ।
- टैरिफ का सरलीकरण: 5 किलोवाट तक के गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्लैब का विलय कर दिया गया है ताकि पारदर्शिता बढ़े और बिल को समझना आसान हो सके ।
अन्य तकनीकी बदलाव
- स्ट्रीट लाइट: सार्वजनिक स्ट्रीट लाइटिंग श्रेणी के लिए रात में लोड शिफ्ट न होने के कारण ‘दिन के समय’ (TOD) टैरिफ को समाप्त कर दिया गया है ।
- सप्लाई नियम: एलटी (LT) से एचटी (HT) आपूर्ति में बदलाव अब तभी किया जाएगा जब वित्त वर्ष में ‘अधिकतम मांग’ (50 KVA से अधिक) दो के बजाय तीन बार होगी ।
भविष्य की योजना: कम होगी आपूर्ति की लागत
आयोग ने निर्देश दिया है कि डिस्कॉम्स को इस अधिशेष राशि का उपयोग अपने बकाया ऋणों के भुगतान के लिए करना चाहिए । इससे ब्याज का बोझ कम होगा और अंततः बिजली आपूर्ति की लागत में कमी आएगी, जिसका लाभ भविष्य में कम टैरिफ के रूप में सीधे उपभोक्ताओं को मिलेगा ।
