जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के प्रतिष्ठित नीरजा मोदी स्कूल को बड़ी राहत देते हुए उसकी 11वीं और 12वीं कक्षा की मान्यता रद्द करने के केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस गणेश राम मीणा की अदालत ने स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरे विवाद में स्कूल में पढ़ने वाले हजारों छात्रों का कोई दोष नहीं है, लेकिन मान्यता रद्द होने से वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। कोर्ट ने छात्र हितों और स्कूल प्रबंधन के पक्ष के बीच संतुलन बनाते हुए यह राहत प्रदान की है।
अदालत के कड़े निर्देश: जुर्माना भरें और कमियां सुधारें हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने के साथ ही स्कूल प्रबंधन पर कुछ शर्तें भी लागू की हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि:
- स्कूल प्रशासन 10 दिन के भीतर CBSE द्वारा लगाई गई 5 लाख रुपए की जुर्माना राशि जमा करवाए।
- सीबीएसई द्वारा पूर्व में बताई गई तकनीकी और नियमों से जुड़ी कमियों को एक महीने के अंदर दूर किया जाए।
- 45 दिन बाद सीबीएसई की टीम दोबारा स्कूल का निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ 1 नवंबर 2025 की वह दुखद घटना है, जब स्कूल की चौथी मंजिल से कूदकर कक्षा 4 की छात्रा अमायरा ने सुसाइड कर लिया था। इस घटना के बाद सीबीएसई की जांच कमेटी ने स्कूल में सुरक्षा मानकों और नियमों की भारी अवहेलना पाई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर 30 दिसंबर 2025 को सीबीएसई ने कक्षा 9 से 12 तक की मान्यता रद्द कर दी थी। हालांकि, बाद में कक्षा 9-10 की मान्यता बहाल कर दी गई थी, लेकिन 11वीं-12वीं पर 2 साल का प्रतिबंध जारी रखा गया था।
अदालत में दलीलें: छात्र हित सर्वोपरि
- स्कूल का पक्ष: स्कूल की ओर से कहा गया कि वे सीधे तौर पर दोषी नहीं हैं और संबंधित शिक्षक को पहले ही हटाया जा चुका है। स्कूल में करीब 5500 छात्र पढ़ते हैं, जिनकी पढ़ाई और भविष्य दांव पर लगा है।
- CBSE का पक्ष: बोर्ड के वकील ने दलील दी कि नियमों की अवहेलना के कारण यह कदम उठाया गया था और छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने की योजना बनाई गई थी।
- न्याय मित्र (Amicus Curiae): वकील एस एस होरा ने कोर्ट को बताया कि सुरक्षा नियमों में खामियां गंभीर हैं और स्कूल को इसकी पेनल्टी भुगतनी ही चाहिए।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल स्कूल में पढ़ रहे 11वीं और 12वीं के छात्रों के मन से अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं। अब सबकी नजरें 45 दिन बाद होने वाले सीबीएसई के अगले निरीक्षण पर टिकी हैं।
