अलवर (भिवाड़ी): राजस्थान के भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में हुए अवैध पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट को एक महीना बीतने वाला है, लेकिन इंसाफ की राह अब भी धुंधली नजर आ रही है। इस भीषण हादसे में कुल 9 मजदूरों की जान चली गई, बावजूद इसके प्रशासन ने उन सरकारी विभागों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है जिनकी नाक के नीचे यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा था।
हादसे का दर्दनाक घटनाक्रम
बीती 16 फरवरी को खुशखेड़ा की एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ था। हादसे के पहले ही दिन 7 श्रमिकों की मौत हो गई थी। इसके बाद गंभीर रूप से झुलसे दो अन्य श्रमिकों ने इलाज के दौरान 22 और 26 फरवरी को दम तोड़ दिया। इस तबाही ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, लेकिन प्रशासनिक गलियारों में आज भी ‘सब कुछ सामान्य’ दिखाने की कोशिश की जा रही है।
जिम्मेदार विभागों को ‘क्लीन चिट’?
चौंकाने वाली बात यह है कि रीको (RIICO), प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर परिषद, श्रम विभाग और फैक्ट्री एवं बॉयलर्स विभाग के अफसरों पर अब तक कोई आंच नहीं आई है।
- दिखावे की जांच: प्रशासन ने इन्हीं विभागों के अफसरों की एक संयुक्त टीम बनाकर अन्य फैक्ट्रियों की जांच का जिम्मा सौंप दिया।
- नोटिस का खेल: इस टीम ने 1058 इकाइयों को कागजी नोटिस देकर स्पष्टीकरण तो मांगा, लेकिन कितनी इकाइयों ने जवाब दिया और उन पर क्या कार्रवाई हुई, इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
अब तक क्या हुई कार्रवाई?
हादसे के संबंध में अब तक कुल 3 FIR दर्ज की गई हैं और 3 गिरफ्तारियां हुई हैं:
- हेमंत शर्मा: भूखंड का किरायानामा करने वाला (शाहजहांपुर से गिरफ्तारी)।
- अभिनंदन तिवारी: सुपरवाइजर (भिवाड़ी से गिरफ्तारी)।
- हेमंत सचदेवा: मुख्य आरोपी (दिल्ली से गिरफ्तारी)। इनके अलावा, लापरवाही के आरोप में टपूकड़ा के हेड कांस्टेबल योगेश कुमार को सस्पेंड किया गया है।
सहायता राशि और राजनीतिक उदासीनता
प्रशासन की ओर से मृतक श्रमिकों के परिजनों को 3-3 लाख रुपये की सहायता दी गई है। वहीं, गंभीर रूप से झुलसे 3 घायलों को 45-45 हजार रुपये दिए गए हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों और जानकारों का मानना है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है। विपक्षी राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर विधानसभा या स्थानीय स्तर पर प्रशासन को घेरने में विफल रहे हैं।
बड़े सवाल जो अब भी बरकरार हैं:
- जिस भूखंड को गारमेंट फैक्ट्री के लिए आवंटित किया गया था, वहां अवैध रूप से पटाखों का निर्माण कैसे हो रहा था?
- रीको और प्रदूषण मंडल के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान इस अवैध गतिविधि को अनदेखा क्यों किया?
- क्या केवल छोटे कर्मचारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कर बड़े अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है?
