जयपुर बना ‘एक्सीडेंट सिटी’? 28 दिनों में 30 मौतें, 100 से ज्यादा हादसे

जयपुर, राजधानी जयपुर… जो अपनी विरासत, पर्यटन और शांति के लिए जानी जाती थी, आज उसी जयपुर की सड़कें मौत का दूसरा नाम बन चुकी हैं। अगर आप सड़क पर चल रहे हैं, बाइक चला रहे हैं या कार में सफर कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए — क्योंकि यहां कब, कहां और किस रूप में मौत सामने आ जाए, कोई नहीं जानता। बीते 28 दिनों के आंकड़े चीख-चीखकर यह बयां कर रहे हैं कि जयपुर की सड़कें खून से लथपथ हैं। हर दिन कोई न कोई परिवार उजड़ रहा है, कहीं मां-बाप का सहारा छिन रहा है तो कहीं मासूम की सांसें थम जा रही हैं।

28 दिन, 30 जिंदगियां खत्म
जनवरी में ही जयपुर एक्सीडेंट कैपिटल बन चुका है। 1 से 28 जनवरी के बीच जयपुर के चारों जिलों में 100 से ज्यादा सड़क हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में अब तक 30 लोगों की मौत हो चुकी है। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, ये 30 घरों के परिवार की खुशियां उजड़ी हैं, 30 परिवारों का सहारा टूट चुका है। सबसे डराने वाली बात यह है कि बीते एक हफ्ते में ही चार बड़े हादसों में चार लोगों की जिंदगियां लील गई, जिसने पूरे शहर को दहशत में डाल दिया है।

मासूम से लेकर मेहनतकश तक… कोई सुरक्षित नहीं
तेज रफ्तार ने छीन ली कई जिंदगियां

18 जनवरी को गांधीनगर इलाके में चार साल की मासूम वियांशी ऑटो से गिर गई। तेज रफ्तार ऑटो ने उसकी जान ले ली। एक मासूम, जो शायद स्कूल भी ठीक से नहीं गई थी, सड़क की लापरवाही की भेंट चढ़ गई।

20 जनवरी को करधनी एक्सप्रेस वे पर तेज रफ्तार थार ने 18 वर्षीय अनाया को कुचल दिया। अनाया एयरफोर्स की तैयारी कर रही थी, देश की सेवा का सपना देख रही थी, लेकिन तेज रफ्तार ने उसके सपनों को हमेशा के लिए तोड़ दिया।

22 जनवरी को बनीपार्क इलाके में तेज रफ्तार कार ने पतासी बेचने वाले हनुमान प्रसाद को टक्कर मार दी। रोजी-रोटी की तलाश में निकले हनुमान की मौके पर ही मौत हो गई।

24 जनवरी को जयपुर के व्यस्त जयंती बाजार में एक बार फिर थार बनी काल। डिलीवरी बॉय फैजान को टक्कर मारी गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

थार गाड़ी बनी ‘मौत की मशीन’ तीन मौतें

जयपुर में खासतौर पर थार गाड़ियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। 3 दिसंबर को ज्योति नगर इलाके में लाल रंग की थार ने केशव नाम के युवक को कुचल दिया। गाड़ी एक महिला क्रिकेटर भव्या चला रही थी।

20 जनवरी को ब्लैक थार ने 18 वर्षीय अनाया की जान ले ली। गाड़ी जीतेंद्र चौधरी के नाम से रजिस्टर्ड बताई जा रही है, जो हादसे के बाद फरार है।

24 जनवरी को जयंती बाजार में ब्लैक थार ने डिलीवरी बॉय फैजान को कुचल दिया। पुलिस ने चालक मनीष को गिरफ्तार किया।

ओवरस्पीड + नशा + झपकी आना + ट्रैफिक नियमों की अनदेखी = मौत का फॉर्मूला

जानकारों ने बताई हादसों की बड़ी वजह

ट्रैफिक एक्सपर्ट्स और कानूनविज्ञ चंद्रशेखर कछावा
जानकारों का कहना है कि जयपुर में सड़क हादसों के पीछे चार बड़े कारण सामने आ रहे हैं—
तेज रफ्तार
शराब पीकर वाहन चलाना
ट्रैफिक नियमों की अनदेखी
भारी वाहनों की लापरवाह ड्राइविंग

कई मामलों में हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो जाते हैं, जिससे पीड़ित परिवारों को इंसाफ तक नहीं मिल पाता।
पुलिस की ढिलाई भी सवालों के घेरे में
कमजोर धाराओं में केस, आसानी से जमानत
हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट वीरेंद्र सिंह का कहना है कि पुलिस अक्सर ऐसे मामलों में गैर-इरादतन हत्या की कमजोर धाराएं लगाती है, जिससे आरोपी आसानी से जमानत पर छूट जाते हैं। उनका कहना है कि—“अगर पुलिस सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज करे और इसे गैर-इरादतन हत्या नहीं बल्कि गंभीर अपराध माने, तभी ऐसे हादसों पर लगाम लग सकती है।”

लोगों में डर का माहौल“घर से निकलते वक्त डर लगता है”

जयपुर के आम लोगों का कहना है कि अब सड़क पर निकलना डरावना हो गया है। किसी को नहीं पता कि कौन सी गाड़ी कब कुचल दे। लोगों ने सरकार और पुलिस से मांग की है कि—शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, ओवरस्पीडिंग पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए, सीसीटीवी और स्पीड कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए
हादसे के बाद फरार चालकों पर कड़ी सजा तय हो

साल की शुरुआत में ही डरावने आंकड़े, कब जागेगा सिस्टम?

अभी साल 2026 शुरू हुए एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है और जयपुर में सड़क हादसों ने डरावनी रफ्तार पकड़ ली है। अगर अभी भी यातायात और परिवहन विभाग ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में जयपुर की सड़कें यूं ही लाशें गिनती रहेंगी। सवाल सिर्फ इतना है —
क्या सिस्टम किसी और मासूम, किसी और मेहनतकश की मौत का इंतजार कर रहा है?

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