आमेर में ‘न्याय सेवा संगम’ का आगाज: न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी बोले— “अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक स्वाभिमान के साथ पहुँचेगा न्याय”

जयपुर, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को आमेर के नवलखा स्टेडियम में ‘न्याय सेवा संगम’ मेगा जन कल्याण शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर ने बदलते भारत की उस तस्वीर को पेश किया, जहाँ सरकार और न्यायपालिका स्वयं चलकर जनता के द्वार तक पहुँची।

न्याय अब सुलभ और स्वाभिमानपूर्ण

शिविर के मुख्य अतिथि राजस्थान उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “न्याय सेवा संगम केवल एक शिविर नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो समाज के सबसे वंचित व्यक्ति को स्वाभिमान के साथ उसका हक दिला रहा है।” विशिष्ट अतिथि न्यायाधीश श्री इंद्रजीत सिंह ने भी सस्ता और समयबद्ध न्याय दिलाने की संवैधानिक भावना पर जोर दिया।


एक ही मंच पर 20 विभाग: सेवाओं की लगी झड़ी

जिला कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी की देखरेख में आयोजित इस मेगा शिविर में 20 से अधिक सरकारी विभागों ने अपनी सेवाएं दीं। शिविर की कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार रहीं:

  • आर्थिक सहायता: पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत 9 लाख रुपये का चेक और राजीविका समूहों को 50 लाख रुपये के चेक वितरित किए गए।
  • दस्तावेज और प्रमाण पत्र: नगर निगम और राजस्व विभाग ने मौके पर ही 115 मूल निवास, 215 जाति प्रमाण पत्र और 52 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए।
  • स्वास्थ्य सेवा: चिकित्सा और आयुष विभाग की ओपीडी में 1,100 से अधिक लोगों का उपचार किया गया।
  • सशक्तीकरण: सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा 34 स्कूटी और शिक्षा विभाग द्वारा 168 साइकिलों का वितरण किया गया।
  • डिजिटल और पर्यावरण: पीएम सूर्यघर योजना के 42 आवेदन और कृषि विभाग द्वारा 42 मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार किए गए।

सांस्कृतिक छटा और विधिक साक्षरता

शिविर में केवल कागजी कार्यवाही ही नहीं हुई, बल्कि जन-जागरूकता का संदेश भी दिया गया। एक निजी विश्वविद्यालय के विधि छात्रों ने NALSA (नालसा) के थीम सॉन्ग पर शानदार नृत्य प्रस्तुति दी, जिसने विधिक साक्षरता के संदेश को जीवंत कर दिया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पवन जीनवाल ने बताया कि ‘न्याय आपके द्वार’ और ‘मेडिएशन फॉर नेशन’ जैसे अभियानों के तहत पात्र व्यक्तियों को मौके पर ही यूआईडी कार्ड और विधिक साहित्य प्रदान किया गया ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें।

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