राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फरमान: 1 जुलाई तक ठीक करें स्कूल की जर्जर दीवारें वरना लगेगा ताला, मासूमों की सुरक्षा पर ‘नो कॉम्प्रोमाइज’

Ravindar Kumar
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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकारी और निजी स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। न्यायाधीश महेन्द्र कुमार गोयल और न्यायाधीश अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने झालावाड़ स्कूल हादसे पर स्वप्रेरणा से दर्ज याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि स्कूल भवन सुरक्षित नहीं हैं, तो उन्हें 1 जुलाई 2026 से संचालित नहीं होने दिया जाएगा। अदालत ने सरकार को चेतावनी दी कि अदालती आदेश की पालना में ‘बजट की कमी’ जैसा कोई भी बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्री-प्राइमरी के लिए नया नियम: न बेसमेंट, न ऊपरी मंजिल ।

छोटे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मौखिक टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार, प्री-प्राइमरी (Pre-Primary) के बच्चों की कक्षाएं अनिवार्य रूप से केवल भूतल (Ground Floor) पर ही चलनी चाहिए। उन्हें न तो बेसमेंट में बिठाया जाए और न ही भवन की ऊपरी मंजिलों पर, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।


हाईकोर्ट की सुनवाई के मुख्य बिंदु: एक नज़र में (Table)

विषयकोर्ट का निर्देश / टिप्पणी
अल्टीमेटमअसुरक्षित स्कूल 1 जुलाई से बंद कर दिए जाएं
प्रमाणन (Certification)केवल चार्टर्ड इंजीनियर से सर्टिफाइड स्कूल ही चलेंगे
प्री-प्राइमरी क्लासकेवल भूतल (Ground Floor) पर संचालन अनिवार्य
बजट का मुद्दासरकार की समस्या है, कोर्ट को आदेश की पालना चाहिए
मुख्य सचिव की भूमिकाकार्ययोजना पर शपथ पत्र (Affidavit) पेश करना होगा

कागजों में चल रहा काम: 3700 में से केवल 5 भवनों का काम शुरू ।

सुनवाई के दौरान स्कूल भवनों की मरम्मत की जमीनी हकीकत सामने आने पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई।

  • लक्ष्य: 3700 स्कूलों के लिए नए भवन बनने थे।
  • हकीकत: केवल 114 को स्वीकृति मिली और अब तक महज 5 भवनों का काम प्लिन्थ लेवल तक पहुंचा है।अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मार्च में बजट लैप्स होने वाला है और विभाग अभी तक केवल टेंडर प्रक्रिया में ही उलझा हुआ है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि क्यों न चार्टर्ड इंजीनियर नियुक्त किए जाएं, जो स्कूलों की सुरक्षा की जांच करें और केवल उन्हीं स्कूलों को चलने दें जिन्हें वे सुरक्षित घोषित करें।

प्रवासियों से मिला 11 करोड़ का सहयोग ।

सुनवाई में यह भी सामने आया कि राज्य सरकार ने स्कूल भवनों के निर्माण के लिए प्रवासियों (NRIs) से भी मदद मांगी है, जिसके जरिए अब तक 11 करोड़ रुपये का सहयोग प्राप्त हुआ है। हालांकि, केंद्र सरकार ने कहा कि राज्य की ओर से मांगे गए अतिरिक्त बजट के संबंध में अभी तक अधिकारियों से स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई है।

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