लोक संगीत की गूंज और सिनेमा का जादू: जयपुर में ‘आईस्टार्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ राजस्थान’ का भव्य आगाज़

जयपुर, राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026 के पहले दिन रविवार को ‘आईस्टार्ट फिल्म फेस्टिवल ऑफ राजस्थान’ (IFFOR) का रंगारंग शुभारंभ हुआ। महोत्सव की शुरुआत सुप्रसिद्ध भपंग वादक युसूफ खान और उनके समूह की जीवंत प्रस्तुति से हुई। भपंग के एक तार से निकले राजस्थानी लोक संगीत ने न केवल समां बांधा, बल्कि आधुनिक तकनीक के बीच प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती को भी दर्शाया।

पटकथा से परदे तक: विशेषज्ञों का संवाद

फिल्म निर्माण की बारीकियों को समझने के लिए ‘अंडरस्टैंडिंग सिनेमेटिक क्रॉफ्ट: फ्रॉम स्क्रिप्ट टू स्क्रीन’ विषय पर एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें फिल्म जगत के दिग्गजों ने अपने अनुभव साझा किए:

  • क्षेत्रीय सिनेमा की शक्ति: विशेषज्ञों ने जोर दिया कि क्षेत्रीय भाषाई सिनेमा को एक मजबूत ‘स्टोरीटेलिंग इकोसिस्टम’ की जरूरत है।
  • मिट्टी की खनक: अभिनेत्री इंदिरा तिवारी ने कहा कि अभिनय और पटकथा में मौलिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “क्रिएटिविटी में मिलावट की जगह नहीं होनी चाहिए, तभी सिनेमा घर-घर पहुंचेगा।”
  • तकनीकी पहलू: सिनेमेटोग्राफर लॉरेंस डी’कुन्हा ने इमेजिनेशन (कल्पनाशीलता) को सिनेमेटोग्राफी की सबसे अहम विधा बताया।

पैनल में फिल्म एडिटर नितिन बैद, साउंड डिजाइनर धीमन कर्माकर, अभिनेता नमित दास, सुकांत गोयल और निर्देशक निधि सक्सेना जैसे दिग्गजों ने भी सार्थक विचार रखे।

पहले दिन 24 फिल्मों की स्क्रीनिंग

फेस्टिवल के पहले दिन दर्शकों को विश्वस्तरीय सिनेमा का अनुभव मिला। कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं रहीं:

  • फिल्म स्क्रीनिंग: शुरुआत फीचर फिल्म ‘कैसी ये पहेली’ से हुई, जिसके बाद ‘द राइज वॉल्यूम’, ‘ह्यूमंस इन द लूप’ और ‘नानेरा’ जैसी महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्री और फिल्में दिखाई गईं।
  • इमर्सिव आर्ट: स्क्रीनिंग हॉल्स में आधुनिक विजुअल आर्ट इंस्टॉलेशंस लगाए गए।
  • विरासत का प्रदर्शन: ‘IFFOR वॉकथ्रू’ में सुधीर कासलीवाल की फोटोग्राफी और जयपुर रग्स के ‘मनचाहा’ संग्रह के जरिए पारंपरिक शिल्प को आधुनिकता के साथ जोड़कर पेश किया गया।

तकनीक और कहानी का संगम

यह फिल्म फेस्टिवल राजस्थान की नई एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स एवं एक्सटेंडेड रियलिटी (AVGC-XR) नीति का एक अभिन्न हिस्सा है। इसका उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि राजस्थान को एक ‘ग्लोबल स्टोरीटेलिंग हब’ के रूप में विकसित करना और स्थानीय युवाओं को रचनात्मक उद्योगों में अंतरराष्ट्रीय अवसर प्रदान करना है।

Share This Article
Leave a Comment