जयपुर: राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) द्वारा आयोजित सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा-2018 के परिणाम में एक महाघोटाला सामने आया है। इस फर्जीवाड़े में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस जांच में सामने आया है कि OMR शीट की स्कैनिंग और परिणाम तैयार करने वाली कंपनी ने चयन बोर्ड के अधिकारियों के साथ साठगांठ करके अयोग्य अभ्यर्थियों को पास करने के लिए अंकों में भारी हेरफेर किया। चयनित अभ्यर्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले लाखों रुपए की घूस लेने का खुलासा हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक 9 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
35.85 अंक आए थे, स्कैनिंग में बढ़ाकर कर दिए 183.85
SOG जांच में OMR शीट से छेड़छाड़ का चौंकाने वाला सच सामने आया। गिरफ्तार की गई महिला आरोपी कामोद मीणा की मूल OMR शीट के अनुसार उसे परीक्षा में महज 35.85 अंक मिले थे।
लेकिन, आरोप है कि OMR स्कैनिंग के दौरान रामब लिमिटेड (स्कैनिंग कंपनी) के कर्मचारियों और बोर्ड के अधिकारियों ने मिलीभगत कर उसकी शीट में फर्जी तरीके से गड़बड़ी की और उसके अंक बढ़ाकर सीधे 183.85 कर दिए, जिससे वह चयन सूची (Selection List) में आ गई। इस काम के बदले लाखों रुपए का लेन-देन होने की बात भी सामने आई है।
बोर्ड अधिकारी और कंपनी के कर्मचारी हैं मुख्य सरगना
SOG के अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के तत्कालीन एनालिस्ट कम प्रोग्रामर (उप निदेशक) संजय माथुर, प्रोग्रामर प्रवीण गंगवाल को पूर्व में ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसके अलावा, OMR शीट स्कैन करने वाली कंपनी ‘रामब लिमिटेड’ के कर्मचारी विनोद कुमार गौड़ और शादान खान पर भी अन्य अभ्यर्थियों के परिणाम में छेड़छाड़ कर मोटी रकम ऐंठने का आरोप है।
सहयोगी मनराज मीणा और आरोपी कामोद मीणा गिरफ्तार
SOG की ताजा कार्रवाई में जयपुर से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है:
- कामोद मीणा (32 वर्ष): निवासी महादेवपुरा, थाना चाकसू, जयपुर। इसी महिला के अंक बढ़ाए गए थे।
- मनराज मीणा (38 वर्ष): निवासी प्रतापपुरा, थाना निवाई, जिला टोंक। इसने सहयोगी की भूमिका निभाई और पैसे के लेन-देन में मध्यस्थता की।
SOG ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर ले लिया है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि OMR में हेरफेर किस स्तर पर और किस तकनीक से किया गया, इसमें और कितने सफेदपोश लोग शामिल हैं और कितने करोड़ का लेन-देन हुआ है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
SOG ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (पहले IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज बनाना) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ-साथ ‘राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम-1992’ की धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 और 84 के तहत गंभीर मामला दर्ज किया है। मामले में आगे की सघन जांच जारी है।