जयपुर: शहर में रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर घरों में घुसकर मोबाइल चोरी करने वाले एक सक्रिय गिरोह का रामनगरिया थाना पुलिस ने महज 10 घंटे के भीतर खुलासा किया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिनकी निशानदेही पर चोरी के 15 महंगे मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। खास बात यह है कि इस चोर गिरोह के साथ-साथ चोरी का माल खरीदने वाले एक मोबाइल रिपेयरिंग दुकानदार को भी पुलिस ने धर दबोचा है।
ऐसे हुआ मामले का खुलासा
घटना 26 अगस्त की सुबह करीब पांच बजे की है, जब रामनगरिया थाना क्षेत्र में एक परिवार घर के अंदर सो रहा था। इसी दौरान आरोपियों ने खुले गेट का फायदा उठाया और घर के अंदर घुसकर कमरे में रखे दो महंगे मोबाइल फोन चोरी कर फरार हो गए। सुबह उठने पर जब परिवार को फोन गायब मिले, तो उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए रामनगरिया थाना पुलिस ने इलाके में सक्रिय संदिग्धों और अन्य हालिया चोरी की वारदातों की फाइलें खंगालनी शुरू कीं।
सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस से मिली सफलता
पुलिस टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, मुखबिर तंत्र और तकनीकी सर्विलांस की मदद से संदिग्धों की तलाश तेज की। कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस को एक संगठित गिरोह का सुराग मिला। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर तीन मुख्य आरोपियों—लखन सिंह उर्फ भूरिया, अंशुल जैन उर्फ छोटू और चोरी का माल खरीदने वाले दुकानदार हेमराज उर्फ हेमू को गिरफ्तार कर लिया।

अय्याशी और आसान कमाई के लिए बनते थे चोर
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि आरोपी किसी मजबूरी के चलते नहीं, बल्कि ऐशो-आराम और मौज-मस्ती के लिए चोरी की राह पर चले थे। वे रात के समय शहर में घूमते थे और ऐसे घरों को निशाना बनाते थे जिनके दरवाजे खुले होते थे या जहां लोग गहरी नींद में सोते थे। मौका पाकर वे कमरे में रखे मोबाइल साफ कर देते थे।
चोरी किए गए इन मोमोबाइल फोन को आगे ठिकाने लगाने के लिए वे हेमराज उर्फ हेमू की मोबाइल रिपेयरिंग दुकान का इस्तेमाल करते थे। हेमराज चोरी के इन फोनों को कम कीमत पर खरीदकर आगे बेचता था।
कई अन्य वारदातों के खुलासे की उम्मीद
पुलिस अब बरामद किए गए 15 मोबाइलों के आईएमईआई (IMEI) नंबर और तकनीकी डाटा के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि इन फोनों से जयपुर के किन-किन इलाकों की पुरानी चोरियों का राज खुल सकता है। पुलिस का मानना है कि आरोपियों से रिमांड के दौरान पूछताछ में शहर में सक्रिय अन्य चोरों और खरीदारों के नेटवर्क का भी बड़ा खुलासा हो सकता है।