राजस्थान कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला, बहुविवाह पर पूर्ण बैन और लिव-इन रिलेशनशिप के बने कड़े नियम

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राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल का अनुमोदन कर दिया गया है। इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसी व्यवस्थाओं को व्यवस्थित और समान बनाना है। हालांकि, आदिवासी और जनजाति क्षेत्रों के रीति-रिवाजों को इस एक्ट के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य

नए कानून के तहत शादी और तलाक के नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया है:

  • 60 दिन की डेडलाइन: विवाह और तलाक होने के 60 दिन के भीतर उसका रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
  • 10 हजार का जुर्माना: यदि कोई व्यक्ति तय समय सीमा में रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उस पर 10,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
  • लिव-इन रिलेशनशिप: अब लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को भी अपने रिश्ते की शुरुआत और समाप्ति (ब्रेकअप) की आधिकारिक जानकारी संबंधित विभाग को देनी होगी।

बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण प्रतिबंध

प्रदेश में यूसीसी (UCC) कानून लागू होने के बाद एक से ज्यादा शादी (बहुविवाह) करने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। हालांकि, पुनर्विवाह (Remarriage) करने की पूरी छूट दी गई है। बता दें कि पहले कई समुदायों में पुनर्विवाह को लेकर पाबंदियां थीं, जिन्हें अब समाप्त कर दिया जाएगा।

उत्तराधिकार: बेटियों और पोतों को संपत्ति में पूरा हक

संपत्ति और उत्तराधिकार के मामलों में UCC एक बड़ा और समान बदलाव लेकर आया है:

  • समान अधिकार: अब सभी धर्मों और समुदायों में पुत्र और पुत्रियों को पैतृक संपत्ति में एक समान अधिकार मिलेगा। पहले कई कानूनों में पुत्रों को संपत्ति का ज्यादा हिस्सा मिलने का प्रावधान था।
  • पोतों को अधिकार: पुराने नियमों के तहत यदि पिता के सामने बेटे की मृत्यु हो जाती थी, तो पोते (Grandson) को संपत्ति का अधिकार नहीं मिलता था। लेकिन, यूसीसी में अब पोते को भी संपत्ति में पूरा और वैध अधिकार दिया गया है।

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