करौली: राजस्थान के करौली जिले में पंचायतों के पुनर्गठन के बाद भले ही ग्रामीण क्षेत्रों को नई पंचायतों और पंचायत समितियों की सौगात मिल गई हो, लेकिन इनके संचालन के लिए भवनों का न होना एक बड़ा संकट बन गया है। जिले में 71 नई ग्राम पंचायतों के गठन के साथ ही कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 238 से बढ़कर 309 हो गई है। इसके अलावा, कुडगांव, बालघाट और शेरपुर-सुरौठ के रूप में 3 नई पंचायत समितियों का भी गठन किया गया है।

कुल 11 पंचायत समितियां, लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव
करौली, सपोटरा, टोडाभीम और हिण्डौन—इन चारों विधानसभा क्षेत्रों में अब कुल 11 पंचायत समितियां (करौली, मासलपुर, हिण्डौन, श्रीमहावीरजी, सपोटरा, मंडरायल, टोडाभीम, नादौती, कुडगांव, बालघाट और शेरपुर-सुरौठ) हो गई हैं।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने के बीच इन नवगठित 71 ग्राम पंचायतों और 3 नई पंचायत समितियों में निर्वाचित होने वाले सरपंच, प्रधान और अन्य जनप्रतिनिधि आखिर बैठेंगे कहाँ? फिलहाल इनमें से किसी भी नवगठित पंचायत के पास अपना खुद का भवन उपलब्ध नहीं है।
जर्जर भवनों में कामकाज का जोखिम

जिला परिषद के XEN धनकेश मीना के अनुसार, नवगठित पंचायतों और समितियों के भवनों के लिए फिलहाल जमीन का चिन्हीकरण किया जा रहा है।
- विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अधिकारियों ने खाली पड़े सरकारी भवनों को चिन्हित कर उनमें अस्थायी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।
- इनमें से कई सरकारी भवन पहले से ही जर्जर हालत में हैं। ऐसे में यदि इन जर्जर भवनों में कार्यालय संचालित किए जाते हैं और कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह एक बड़ा गंभीर सवाल है।
समय पर व्यवस्था न होने से कामकाज पर असर
पुनर्गठन से पहले जिले में 238 ग्राम पंचायतें और 8 पंचायत समितियां थीं, जो अब बढ़कर क्रमशः 309 और 11 हो गई हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद स्थायी भवन, कार्यालय, फर्नीचर और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव में चुनाव के बाद नियमित कामकाज के ठप होने की आशंका जताई जा रही है। जनता और जानकारों का सवाल है कि बिना भवनों और बुनियादी व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किए चुनाव कराने की जल्दबाजी क्यों की जा रही है?
