करौली, राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली के प्रधानाचार्य (प्रिंसिपल) डॉ. रमेश चंद मीना और जिला प्रशासन के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने प्रशासनिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने और नियमों की अनदेखी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए प्रिंसिपल को 17 CCA का नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के बाद मेडिकल कॉलेज में चल रही व्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।

कलेक्टर को ही समिति में कर दिया ‘जूनियर’ मनोनीत
पूरा मामला मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण कार्यों व अन्य गतिविधियों की निगरानी के लिए बनाई गई एक समिति से जुड़ा है। प्रिंसिपल ने नियमों को ताक पर रखकर अपनी अध्यक्षता में एक समिति बनाई और उसमें जिले के मुखिया यानी जिला कलेक्टर को ही एक सदस्य के तौर पर मनोनीत कर दिया। नियमानुसार, किसी भी समिति में उच्चाधिकारी को सदस्य के रूप में मनोनीत करना प्रोटोकॉल और राजकार्य के प्रति भारी लापरवाही माना जाता है।
कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए प्रिंसिपल को 3 दिन के भीतर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जांच हुई तो निकल सकते हैं भ्रष्टाचार के ‘कंकाल’
प्रिंसिपल को मिले इस नोटिस के बाद कॉलेज के अंदरूनी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों की मानें तो यह महज एक प्रशासनिक चूक नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरे राज दबे हो सकते हैं।
- टेंडर और मैनपावर भर्ती में धांधली: मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य पदों के लिए होने वाली टेंडर प्रक्रिया और भर्तियों में बड़े स्तर पर ‘लूट-खसोट’ के आरोप लग रहे हैं।
- बजट की बंदरबांट: सरकार की ओर से कॉलेज को मिलने वाले भारी-भरकम बजट के उपयोग में पारदर्शिता की कमी बताई जा रही है।
- सामग्री खरीद में खेल: कॉलेज के लिए खरीदे जाने वाले उपकरणों और अन्य सामानों की खरीद प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है।
जानकारों का कहना है कि यदि सरकार प्रिंसिपल के पदभार संभालने के दिन से लेकर अब तक की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच करवाती है, तो मैनपावर भर्ती और सामान की खरीद में बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
