टोंक/टोडारायसिंह: राजस्थान के टोंक जिले के टोडारायसिंह थाने में बजरी खनन से जुड़े एक पुराने मामले में गंभीर लापरवाही और अवैध वसूली का बड़ा मामला सामने आया है। न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन थानाधिकारी समेत 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। परिवादी का आरोप है कि 50 हजार रुपए की रिश्वत न देने पर पुलिस ने उसका खाली डंपर अवैध बजरी से भरा हुआ बताकर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया था।
किन-किन पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुआ केस?
वर्तमान टोडारायसिंह थानाधिकारी मुकेश कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि यह मामला अक्टूबर 2025 में सामने आए उस प्रकरण से जुड़ा है, जब पुलिस ने बजरी जब्ती की कार्रवाई की थी। टोरड़ी (मालपुरा) निवासी परिवादी मोहित कुमार जैन द्वारा न्यायालय में पेश किए गए इस्तगासे के आधार पर गुरुवार को निम्नलिखित छह पुलिसकर्मियों को नामजद किया गया है:
- हरिराम चौधरी (तत्कालीन थाना प्रभारी)
- महावीर बराला (तत्कालीन एएसआई)
- रंगलाल गुर्जर (तत्कालीन हेड कांस्टेबल)
- कालूराम चौधरी (कांस्टेबल)
- रामनारायण (होमगार्ड)
- नंदकिशोर (112 वाहन चालक)
इन सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसकी जांच मालपुरा के वृत्ताधिकारी (CO) द्वारा की जा रही है।

क्या है परिवादी का आरोप?
परिवादी मोहित कुमार जैन का आरोप है कि 15 अगस्त 2025 की रात उसका डंपर पूरी तरह खाली था। मोर थाना क्षेत्र से पुलिसकर्मी उस खाली डंपर को अपने कब्जे में लेकर टोडारायसिंह थाने पहुंचे थे। थाने में पहुंचने के बाद उससे 50 हजार रुपए की अवैध मांग की गई। जब उसने राशि देने से इंकार कर दिया, तो पुलिस ने रंजिशवश उसके खाली डंपर को अवैध बजरी से भरा हुआ दर्शाते हुए एक झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया।
परिवादी के पास मौजूद हैं पुख्ता सबूत
अपने दावों को सही साबित करने के लिए परिवादी ने अदालत और पुलिस के समक्ष कई तकनीकी साक्ष्य होने की बात कही है। उसका दावा है कि घटनाक्रम से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, जीपीएस (GPS) लोकेशन और अन्य जरूरी दस्तावेज उसके पास मौजूद हैं, जिनसे उस रात डंपर की वास्तविक स्थिति और उसकी सही लोकेशन का खुलासा हो सकता है।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। मालपुरा सर्कल ऑफिसर इस पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और तमाम तकनीकी तथ्यों की गहराई से जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
