राजस्थान में निकाय-पंचायत चुनाव में नहीं चलेगी ‘फर्जीगिरी’, BNS के तहत होगी कार्रवाई, पकड़े गए तो होगी ये सजा!

राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव का रण सज रहा है। राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ चुके हैं। जल्द ही फिजाएं भी पूरी तरह चुनावी हो जाएगी। इस बार के चुनाव कई मायनों में खास रहने वाले हैं। खासकर चुनावों में गड़बड़ियों के मामले में लगने वाले कानून को लेकर। फर्जी मतदान और मतदाता प्रतिरूपण के मामलों में अब भारतीय दंड संहिता नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव अधिकारियों और पुलिस को नए आपराधिक कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

पुरानी आईपीसी धारा बाय-बायओं, अब BNS… क्या कहता है कानून

पहले चुनाव में किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर वोट देने के मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 171-D और 171-F का इस्तेमाल किया जाता था। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद अब इस प्रकार के अपराधों में BNS की धारा 172 और 174 का उल्लेख किया जाएगा। धारा 172 अपराध की परिभाषा देती है, जबकि धारा 174 उसकी सजा से संबंधित है। ऐसे में कहा जा सकता है कि फर्जी मतदान के मामले में धारा 172 के साथ धारा 174 के तहत कार्रवाई होगी।
फर्जी पहचान के आधार पर मतदान करने, किसी अन्य जीवित या मृत व्यक्ति के नाम से वोट डालने या एक बार मतदान करने के बाद दोबारा वोट देने का प्रयास भारतीय न्याय संहिता की धारा 172 के तहत चुनाव में प्रतिरूपण का अपराध माना गया है। इसकी सजा धारा 174 में निर्धारित है जिसके तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक का कारावास, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। यह अपराध गैर-संज्ञेय और जमानती श्रेणी में आता है।

बनेगा नया इतिहास, पहली बार स्थानीय चुनावों में नए आपराधिक कानून का इस्तेमाल

भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद राजस्थान में होने वाले ये पहले व्यापक स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव होंगे। ऐसे में निर्वाचन अपराधों की एफआईआर (FIR), शिकायतों और न्यायिक कार्रवाई में पुराने IPC प्रावधानों की जगह नए कानून का उपयोग किया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव से संबंधित अनेक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और मतदाताओं की पहचान के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों संबंधी नया आदेश भी 30 जुलाई 2026 को जारी किया है।

वोटर ID नहीं है तो ये है विकल्प…

किसी मतदाता का नाम मतदाता सूची में दर्ज है लेकिन उसके पास मतदाता फोटो पहचान पत्र नहीं है तो वह आयोग द्वारा मान्य वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेगा। ऐसे 11 वैकल्पिक दस्तावेज हैं जो मान्य होंगे।
इनमें आधार कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट, फोटोयुक्त पेंशन दस्तावेज और बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक जैसे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं।
यह साफ है कि केवल पहचान दस्तावेज दिखाना पर्याप्त नहीं होगा। मतदान के लिए संबंधित मतदाता का नाम उस निर्वाचन क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में दर्ज होना अनिवार्य है।

जरूरी जानकारी…

मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया जारी है। नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए 1 जनवरी 2026 की अर्हता तिथि के आधार पर तैयार मतदाता सूचियों का निरंतर अद्यतन किया जा रहा है। चुनाव की लोक सूचना जारी होने तक पात्र व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जुड़वाने, त्रुटि सुधारने या नाम हटाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे व्यक्ति, जिनकी आयु 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है और नाम मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, वे संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष आवेदन कर सकते हैं।
साथ ही, मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले नाम लिस्ट से हटेंगे। मृत व्यक्तियों, स्थायी रूप से अन्य स्थान पर चले गए मतदाताओं और एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को मतदाता सूची से हटाने के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

मतदाता पहचान पत्र नहीं होने पर 11 वैकल्पिक दस्तावेजों से हो सकेगी वोटिंग
चुनाव अधिसूचना तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की सुविधा
मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया जारी
मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले नाम हटेंगे


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