जयपुर: राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों ने अपनी वर्षों से लंबित मांगों और तबादलों की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजस्थान पंचायती राज व माध्यमिक शिक्षक संघ और तृतीय श्रेणी शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले प्रदेशभर में शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। चरणबद्ध आंदोलन के तहत शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारियों (एडीएम व एसडीएम) को सात सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा है। साथ ही, मांगें पूरी न होने पर 5 अगस्त को जयपुर में व्यापक और निर्णायक आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
प्रमुख 7 सूत्रीय मांगें और आंदोलन के मुख्य बिंदु:
- स्थानांतरण पर रोक हटाने की मांग: प्रदेशाध्यक्ष शेर सिंह चौहान और संयोजक सुनील महला ने बताया कि वर्ष 2018 के बाद से तृतीय श्रेणी शिक्षकों, प्रबोधकों, शारीरिक शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के स्थानांतरण नहीं किए गए हैं, जबकि शिक्षा विभाग के अन्य संवर्गों के तबादले नियमित रूप से हो रहे हैं। सरकार बनने के बाद 100 दिनों में ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू करने का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।
- पदोन्नति और अन्य भुगतान: तृतीय श्रेणी से द्वितीय श्रेणी शिक्षकों के पदों पर पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। इसके अलावा उपार्जित अवकाश, एरियर और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबित पेंशन प्रकरणों का तुरंत भुगतान हो।
- रीट अनिवार्यता और पे-प्रोटेक्शन: वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर ‘रीट’ (REET) परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त की जाए तथा तृतीय श्रेणी शिक्षकों पर लागू पे-प्रोटेक्शन संबंधी आदेश वापस लेकर हो रही वसूली पर रोक लगाई जाए।
- स्टाफिंग पैटर्न और स्कूल भवनों का निर्माण: शिक्षा विभाग में नया स्टाफिंग पैटर्न लागू कर रिक्त पद भरे जाएं और अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त हुए स्कूल भवनों के पुनर्निर्माण के लिए तुरंत बजट जारी किया जाए।
सरकार को दी चेतावनी
बाड़मेर के सेड़वा, धनाऊ और फागलिया ब्लॉक में 1,500 से अधिक शिक्षकों ने आक्रोश सभा निकालकर प्रदर्शन किया। शिक्षक नेताओं ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने जल्दबाजी में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आगामी 5 अगस्त को जयपुर में बड़ा धरना और निर्णायक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।
