जयपुर में जेडीए और वन विभाग के बीच टकराव, 19 अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति खत्म; पौधरोपण अभियान पर पड़ सकता है असर

जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों के बीच बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और वन विभाग के बीच लंबे समय से चल रहे समन्वय विवाद के बीच वन विभाग के 19 अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जेडीए से प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) समाप्त कर उन्हें मूल विभाग में वापस बुला लिया गया है। इस फैसले से जेडीए के पौधरोपण, हरित विकास और वृक्ष संरक्षण से जुड़े कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

वर्षों से जेडीए में दे रहे थे सेवाएं

जानकारी के अनुसार वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लंबे समय से जेडीए में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत थे। ये अधिकारी शहर में हरित क्षेत्र विकसित करने, पौधरोपण, वृक्षों के संरक्षण, ट्रांसप्लांटेशन और पर्यावरणीय परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अहम भूमिका निभा रहे थे। अब एक साथ 19 अधिकारियों की वापसी से इन कार्यों की गति प्रभावित हो सकती है।

पौधरोपण अभियान पर असर की आशंका

राजस्थान सरकार इस वर्ष बड़े स्तर पर पौधरोपण अभियान चला रही है। ऐसे समय में वन विभाग के अनुभवी अधिकारियों की वापसी से जेडीए के प्रस्तावित पौधरोपण कार्यक्रम, पार्कों के विकास, ग्रीन कॉरिडोर और वृक्षारोपण परियोजनाओं के संचालन पर असर पड़ सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी विशेषज्ञता की कमी से कई परियोजनाओं की रफ्तार धीमी हो सकती है।

प्रशासनिक समन्वय बना चुनौती

सूत्रों के अनुसार जेडीए और वन विभाग के बीच कार्यों के अधिकार क्षेत्र, प्रशासनिक नियंत्रण और संसाधनों के उपयोग को लेकर काफी समय से मतभेद चल रहे थे। इसी क्रम में प्रतिनियुक्त अधिकारियों को मूल विभाग में वापस बुलाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि इस संबंध में दोनों विभागों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

हरित परियोजनाओं की निगरानी पर भी पड़ेगा प्रभाव

वन विभाग के अधिकारी शहर में वृक्षों की गणना, पौधों के रखरखाव, हरित पट्टियों के विकास और पर्यावरणीय मानकों की निगरानी जैसे कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नई व्यवस्था लागू नहीं होती, तब तक इन परियोजनाओं की निगरानी प्रभावित हो सकती है।

सरकार की नई व्यवस्था पर नजर

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जेडीए इन अधिकारियों के स्थान पर नई नियुक्तियां करता है या वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की जाती है। यदि समय रहते नई व्यवस्था नहीं बनाई गई तो राजधानी में चल रही हरित विकास योजनाओं और पौधरोपण अभियान की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।


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