राजस्थान: बाघों के आशियानों पर होटल माफिया का कब्जा, बफर जोन में कंक्रीट का जंगल

Rakhi Singh
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जयपुर। राजस्थान के प्रमुख टाइगर रिजर्व, रणथंभौर और सरिस्का में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास अब कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइंस और इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) के नियमों को ताक पर रखकर इन अभयारण्यों के बफर और 1 किलोमीटर के दायरे में धड़ल्ले से अवैध होटल, गेस्ट हाउस और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बन रहे हैं।

फाइलों में जिम्मेदारी का खेल

इंसानी दखलंदाजी का सीधा असर बाघों की प्रजनन क्षमता और उनके स्वभाव पर पड़ रहा है। सरिस्का और रणथंभौर दोनों ही जगह पर्यटन और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से अवैध निर्माण फल-फूल रहे हैं।

सरिस्का टाइगर रिजर्व: 1 किमी दायरे में 77 अवैध होटल

  • सरिस्का के बफर और क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट (CTH) से 1 किलोमीटर के दायरे में 77 होटल, रेस्टोरेंट और फार्म हाउस अवैध रूप से संचालित हैं।
  • इनमें से कई प्रतिष्ठान प्रभावशाली रसूखदारों और नेताओं के हैं, जिनके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करने से कतरा रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद, इको-सेंसिटिव जोन में व्यावसायिक गतिविधियां बदस्तूर जारी हैं।

रणथंभौर: कृषि भूमि पर आलीशान रिसॉर्ट्स का खेल

  • रणथंभौर में राजस्व नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कृषि भूमि पर 70 से अधिक होटल और 24 से अधिक गेस्ट हाउस बना लिए गए हैं।
  • पशुबाड़ा बनाने की अनुमति लेकर आलीशान रिसॉर्ट खड़े कर दिए गए हैं, जिससे बाघों के कॉरिडोर में बाधा उत्पन्न हो रही है।
  • वाइल्ड लाइफ विशेषज्ञों का कहना है कि शोर-शराबे और रोशनी के कारण बाघों का पर्यावास असुरक्षित हो रहा है।

वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता

विशेषज्ञों के अनुसार, बाघों को टेरिटरी के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है, लेकिन बफर जोन में निर्माण होने से बाघों का क्षेत्र सिमट जाता है। इससे बाघ एक छोटे से टापू नुमा जंगल में कैद होकर रह जाते हैं, जो उनके अस्तित्व के लिए एक बड़ा खतरा है।

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