श्रीगंगानगर: राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 साल की नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस जघन्य अपराध के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। लेकिन इसी बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सनसनी और व्यूज बटोरने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा फर्जी वीडियो और तस्वीरें वायरल की जा रही हैं। इन वीडियो को श्रीगंगानगर की घटना का बताकर शेयर किया जा रहा है, जिससे आम जनता में भ्रम और आक्रोश और भड़क रहा है।
सोशल मीडिया पर क्या किया जा रहा है दावा?
पिछले कुछ दिनों से इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अलग-अलग राज्यों और पुरानी घटनाओं के दर्दनाक वीडियो शेयर किए जा रहे हैं। इन वीडियो और रील्स के साथ कैप्शन में लिखा जा रहा है कि यह श्रीगंगानगर की उसी 13 वर्षीय पीड़िता का वीडियो है। लोग बिना सच्चाई जाने भावुक होकर इन वीडियो को धड़ल्ले से फॉरवर्ड कर रहे हैं।
श्रीगंगानगर पुलिस का आधिकारिक खंडन
सोशल मीडिया पर फैल रही इस अफवाह और भ्रामक जानकारी पर संज्ञान लेते हुए, श्रीगंगानगर पुलिस ने आधिकारिक रूप से एक अपील जारी कर इन दावों की पोल खोली है।
पुलिस ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है:
“सोशल मीडिया पर नाबालिग बालिका दुष्कर्म प्रकरण से संबंधित वायरल हो रहे कई वीडियो, फोटो व रील्स पूरी तरह फर्जी, भ्रामक व तथ्यहीन हैं। इनका श्रीगंगानगर में दर्ज प्रकरण से कोई संबंध नहीं है। पीड़िता सकुशल, सुरक्षित है और अपने परिवार के साथ है।”
अफवाह फैलाने वालों को पुलिस की सख्त चेतावनी
खंडन जारी करने के साथ ही पुलिस प्रशासन ने फर्जी जानकारी फैलाने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। पुलिस ने साफ किया है कि साइबर सेल लगातार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मॉनिटरिंग कर रही है। जो भी व्यक्ति, पेज एडमिन या वॉट्सऐप ग्रुप एडमिन इस तरह के भ्रामक और फर्जी वीडियो को श्रीगंगानगर की घटना से जोड़कर शेयर करेगा या अफवाह फैलाएगा, उसके खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत सीधे FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहचान उजागर करना है गंभीर कानूनी अपराध
पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी दुष्कर्म पीड़िता (विशेषकर नाबालिग) की पहचान उजागर करना, उसका नाम, फोटो या वीडियो शेयर करना एक गंभीर कानूनी अपराध है। किसी अन्य घटना के वीडियो को पीड़िता का बताकर शेयर करना भी उसी श्रेणी का अपराध माना जाएगा।
आम जनता से अपील
न्यूज़ डेस्क पाठकों से अपील करता है कि भावुक होकर बिना पुष्टि किए किसी भी वीडियो या तस्वीर को आगे फॉरवर्ड न करें। यह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उस मासूम पीड़िता और उसके परिवार के लिए गंभीर मानसिक प्रताड़ना का कारण बन सकता है। अफवाहों पर ध्यान न दें और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भरोसा रखें।
