‘मंत्री पद का किया दुरुपयोग’, ACB कोर्ट ने महेश जोशी और संजय बडाया की जमानत याचिका ठुकराई; फर्जी दस्तावेजों पर टेंडर जारी करने का है आरोप

जयपुर: राजस्थान में बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले के मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बडाया की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश राजेश दड़िया ने कड़े शब्दों में टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी ने मंत्री पद पर रहते हुए अपने कर्तव्यों का दुरुपयोग किया, जो आमजन के विश्वास के साथ एक गंभीर विश्वासघात है।

जमानत खारिज करने के मुख्य कारण

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि उपलब्ध दस्तावेजों से प्रथम दृष्टया यह साबित होता है कि महेश जोशी ने कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और विभाग की गोपनीय जानकारियों को अपने करीबियों तक पहुंचाया।

  • ऊंची दरों पर टेंडर: कोर्ट ने पाया कि महेश जोशी ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया और सरकार को आर्थिक नुकसान पहुँचाने वाली ऊंची दरों पर टेंडर जारी करवाए।
  • फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल: ईरकॉन (IRCON) कंपनी के फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया को संचालित किया गया, जिससे नियमों की धज्जियां उड़ीं।
  • गोपनीयता का उल्लंघन: जांच में सामने आया कि संजय बडाया की तत्कालीन मंत्री से घनिष्ठता थी और उसके पास विभाग की अत्यंत गोपनीय फाइलों और जानकारियों तक सीधी पहुंच थी।

ACB का 3 हजार पृष्ठों का चालान

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में एक विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की है। पूर्व मंत्री और संजय बडाया के खिलाफ करीब 3,000 पृष्ठों का चालान पेश किया गया है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय दंड संहिता (IPC) और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं। इससे पहले, इसी घोटाले में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनके खिलाफ 17,500 पन्नों की विशाल चार्जशीट दायर की गई है।

क्या है मामला?

एसीबी के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत विभाग का मुखिया होने के नाते महेश जोशी की पूरी जवाबदेही थी, लेकिन उनके कार्यकाल में न केवल फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया, बल्कि टेंडर आवंटन में भारी धांधली की गई। ट्रांसक्रिप्ट और अन्य डिजिटल सबूतों ने संजय बडाया की संदिग्ध भूमिका को भी पुख्ता किया है, जिसके आधार पर कोर्ट ने फिलहाल उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है।

पूर्व मंत्री महेश जोशी को 7 मई को उनके निवास से गिरफ्तार किया गया था और 11 मई से ही वे न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में हैं।


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