सबके लिए एक दवा का दौर खत्म: राजस्थान में हर महीने 500 से अधिक कैंसर मरीज ले रहे टारगेट थेरेपी, RGHS और चिरंजीवी से मिल रही बड़ी राहत

जयपुर। राजस्थान में कैंसर के उपचार का तरीका अब तेजी से बदल रहा है। चिकित्सा जगत में अब ‘सबके लिए एक जैसी दवा’ (One Size Fits All) वाला पुराना मॉडल पीछे छूट रहा है। प्रदेश में अब मरीजों की जेनेटिक प्रोफाइल (जीन और गुणसूत्रों की जांच) के आधार पर ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ (टारगेटेड थेरेपी) से सटीक इलाज किया जा रहा है। इस आधुनिक तकनीक से दवाएं सीधे कैंसर कोशिकाओं पर वार करती हैं, जिससे मरीजों पर दवाएं ज्यादा असरदार साबित हो रही हैं और उनके साइड इफेक्ट भी नाममात्र के रह गए हैं।

चिरंजीवी और RGHS ने घटाई मरीजों की चिंता: ₹4 लाख तक की दवाएं मुफ्त

कैंसर का इलाज आर्थिक रूप से बेहद खर्चीला माना जाता है, लेकिन राजस्थान में आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं वरदान साबित हो रही हैं।

  • मुफ्त उपचार: निजी बाजार में इस पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के तहत आने वाली दवाओं की कीमत ₹2 लाख से ₹4 लाख या उससे अधिक तक पहुंच जाती है। लेकिन राजस्थान में आरजीएचएस (RGHS) और चिरंजीवी जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से मरीजों को ये महंगी दवाएं पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
  • बढ़ती संख्या: प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में प्रतिदिन 10 से अधिक और पूरे राज्य में हर महीने 500 से अधिक मरीज इस आधुनिक पद्धति से इलाज पा रहे हैं।

पारंपरिक कीमोथेरेपी बनाम टारगेट थेरेपी: क्यों बेहतर है यह तकनीक?

कैंसर रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक कीमोथेरेपी जहां कैंसर सेल्स को मारने के साथ-साथ शरीर की स्वस्थ और सामान्य कोशिकाओं को भी भारी नुकसान पहुंचाती है (जिससे बाल झड़ना, कमजोरी और अत्यधिक उल्टियां जैसे साइड इफेक्ट होते हैं), वहीं कंप्यूटर विज़न और मॉलिक्यूलर स्तर पर काम करने वाली टारगेट थेरेपी सिर्फ और सिर्फ कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को ही निशाना बनाती है। इससे मरीज का शरीर प्रताड़ित नहीं होता, साइड इफेक्ट बेहद कम होते हैं और रिकवरी की रफ्तार बहुत तेज रहती है।

इन कैंसर प्रकारों में मिल रही सबसे सटीक कामयाबी

कैंसर के इलाज की दिशा तय करने में विभिन्न जेनेटिक म्यूटेशन (Genietic Mutation) की पहचान अब बेहद अहम हो चुकी है:

  • लंग्स कैंसर: इसमें $EGFR$, $ALK$ और $ROS1$ जैसे जेनेटिक म्यूटेशन की पहचान कर सटीक दवा दी जा रही है।
  • ब्रेस्ट कैंसर: महिलाओं में बढ़ते इस कैंसर के लिए $HER2$ और $BRCA$ जीन की मैपिंग की जा रही है।
  • प्रोस्टेट कैंसर: पुरुषों में इसकी सटीक पहचान के लिए मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग का सहारा लिया जा रहा है।इसके अलावा ब्लड कैंसर और ओवरी कैंसर में भी यह तकनीक सबसे ज्यादा कारगर साबित हो रही है। हाल ही में जयपुर के अलावा राज्य के अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी डॉक्टरों और स्टाफ को इस तकनीक का विशेष प्रशिक्षण देना शुरू किया गया है।

चुनौती: राजस्थान में सरकारी मॉलिक्यूलर लैब का अभाव

इस उपचार पद्धति में वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि राजस्थान के सरकारी क्षेत्र में अभी तक एक भी एडवांस मॉलिक्यूलर लैब (Molecular Lab) उपलब्ध नहीं है। इसके कारण मरीजों को अपने जीन टेस्ट और कैंसर प्रोफाइलिंग के लिए दिल्ली या मुंबई की लैब्स पर निर्भर रहना पड़ता है। मरीज वहां से अपनी जांच रिपोर्ट लाते हैं, जिसके आधार पर यहां के डॉक्टर्स दवा तय करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में सरकारी स्तर पर मॉलिक्यूलर लैब की स्थापना हो जाए, तो जांच का समय और खर्च दोनों बचेंगे, जिससे हजारों मरीजों को और भी सस्ता तथा समय पर इलाज मिल सकेगा।

देश में कैंसर के बढ़ते मामलों का खतरनाक अनुमान

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और वैश्विक संस्थाओं के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश में प्रति वर्ष कैंसर के मरीजों की संख्या डराने वाली है:

कैंसर का प्रकारदेश में प्रतिवर्ष अनुमानित नए मरीज
ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer)2.38 लाख
लंग्स कैंसर (Lung Cancer)74,763
प्रोस्टेट कैंसर (Prostate Cancer)49,998

2045 तक की डरावनी तस्वीर:

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में देश में एक साल में कुल 15.5 लाख नए कैंसर केस अनुमानित हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि जीवनशैली और पर्यावरण में सुधार नहीं हुआ, तो साल 2045 तक यह आंकड़ा सालाना 24 लाख के पार पहुंच जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, आज हर 9 व्यक्तियों में से 1 व्यक्ति को अपने पूरे जीवनकाल में कैंसर होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में ‘पर्सनलाइज्ड मेडिसिन’ जैसी आधुनिक तकनीक आने वाले समय में मानव जीवन को बचाने के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगी।

एक नज़र में: क्या है पर्सनलाइज्ड मेडिसिन की प्रक्रिया?

  1. सबसे पहले मरीज के ट्यूमर या रक्त से जीन और म्यूटेशन की एडवांस जांच की जाती है।
  2. कैंसर के उप-प्रकार की बिल्कुल 100% सटीक पहचान की जाती है।
  3. मरीज के डीएनए और सेलुलर स्ट्रक्चर के अनुसार कस्टमाइज्ड दवा का चयन होता है।
  4. टारगेट थेरेपी के जरिए केवल प्रभावित हिस्से का इलाज कर बेहतर रिकवरी सुनिश्चित की जाती है।
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