कोटा (राजस्थान): राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार राज्य के करीब 300 महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को फिर से हिंदी माध्यम में बदलने (या पुनः हिंदी माध्यम संचालन की प्रक्रिया शुरू करने) की तैयारी की गई है। यह फैसला शिक्षा व्यवस्था और भाषा नीति को लेकर चल रही बहस को एक बार फिर तेज कर रहा है।
आदेश के पीछे क्या वजह बताई गई
शिक्षा विभाग के अनुसार कई स्कूलों में:
- अंग्रेजी माध्यम में पर्याप्त प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं
- छात्रों के नामांकन (admission) अपेक्षाकृत कम हैं
- संसाधनों और ढांचे का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है
इन्हीं कारणों के आधार पर इन स्कूलों की स्थिति की समीक्षा कर उन्हें हिंदी माध्यम में पुनर्गठित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे कदम
राजस्थान में महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों को लेकर पहले भी नीति में बदलाव देखने को मिले हैं। वर्ष 2019 के बाद से राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम में बदला गया था, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी अंग्रेजी शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
हालांकि बाद में:
- कई जगह शिक्षक कमी की समस्या सामने आई
- इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों की कमी उजागर हुई
- और कुछ स्कूलों में पुनः समीक्षा की मांग उठी
शिक्षा व्यवस्था पर असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार माध्यम बदलने से:
- शिक्षा नीति में अस्थिरता पैदा होती है
- छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है
- शिक्षकों और प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है
वहीं दूसरी ओर, कुछ शिक्षा अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार माध्यम का निर्धारण करना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।
अभिभावकों और स्थानीय स्तर पर चर्चा
इस फैसले के बाद अभिभावकों और स्थानीय स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे:
- व्यावहारिक कदम मान रहे हैं (संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए)
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि:
- अंग्रेजी माध्यम स्कूलों की शुरुआत से जो उम्मीदें थीं, वे कमजोर पड़ सकती हैं
आगे क्या होगा
शिक्षा विभाग अब इन 300 स्कूलों की विस्तृत समीक्षा कर रहा है। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि:
- किन स्कूलों को हिंदी माध्यम में बदला जाएगा
- और किन स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम जारी रहेगा
विभाग का कहना है कि अंतिम निर्णय छात्रों के हित और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।