जयपुर: राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 में RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग) की मनमानी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने करारा प्रहार किया है। आयोग ने काम के बोझ का हवाला देकर उन करीब 4 लाख अभ्यर्थियों को रि-एग्जाम से बाहर कर दिया था, जिन्होंने मूल भर्ती में फॉर्म तो भरा था, लेकिन परीक्षा देने नहीं जा सके थे। अब जस्टिस गणेशराम मीणा की अदालत ने RPSC को दो टूक निर्देश दिया है कि प्रशासनिक असुविधा के नाम पर किसी भी पात्र अभ्यर्थी को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
RPSC का बेतुका तर्क: “4 लाख फॉर्म छांटना बहुत मुश्किल है”
दरअसल, 8 मई को RPSC ने एक प्रेसनोट जारी कर केवल उन 3,83,097 अभ्यर्थियों को ही आवेदन एडिट करने (16 से 30 मई) का मौका दिया था, जिन्होंने 2021 में दोनों पेपर दिए थे। सुनवाई के दौरान RPSC ने कोर्ट में जो तर्क दिया, उसने आयोग की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी। आयोग ने कहा, “4 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने सिर्फ फॉर्म भरा था। कई नौकरी लग चुके होंगे या तैयारी छोड़ चुके होंगे। अगर हम सबको अनुमति देंगे, तो हमें 4 लाख अतिरिक्त फॉर्म्स की छंटनी करनी पड़ेगी, जो बहुत मुश्किल काम है।”

कोर्ट ने दी व्यवस्था: ‘भर्ती प्रक्रिया’ की संकीर्ण व्याख्या न करें
याचिकाकर्ता हवा सिंह व अन्य की ओर से अधिवक्ता रघुनंदन शर्मा ने मजबूती से पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जब हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट (4 मई 2026) ने 2021 की भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया था, तो स्पष्ट निर्देश थे कि ‘भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी अभ्यर्थियों’ के हितों की रक्षा की जाए। इसका मतलब केवल परीक्षा देने वालों तक सीमित नहीं है। बहुत से युवा अपरिहार्य कारणों से उस समय परीक्षा नहीं दे पाए थे।
इस पर कोर्ट ने RPSC के रवैये को प्रथम दृष्टया अनुचित मानते हुए कहा कि ‘भर्ती प्रक्रिया में शामिल’ शब्द की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती। कोर्ट ने आरपीएससी को निर्देश दिए कि वह गुरुवार को सभी याचिकाकर्ताओं को फॉर्म एडिट करने का मौका दे और उन्हें सितंबर में होने वाली परीक्षा में ‘प्रोविजनली’ शामिल करे।

क्या है SI भर्ती विवाद की क्रोनोलॉजी?
- कुल आवेदन: SI भर्ती-2021 में 7.95 लाख युवाओं ने आवेदन किया था।
- परीक्षा में उपस्थिति: 13 से 15 सितंबर 2021 को हुई परीक्षा में केवल 3.83 लाख अभ्यर्थी ही बैठे थे।
- भर्ती रद्द: बड़े स्तर पर धांधली सामने आने के बाद, राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को भर्ती रद्द कर दी।
- अपील खारिज: 4 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ (डिवीजन बेंच) ने भी रद्दीकरण को सही माना।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने चयनित अभ्यर्थियों (ट्रेनी SI) की अपील (SLP) को खारिज कर दिया और रि-एग्जाम का रास्ता साफ कर दिया।