सीकर। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस पॉलिसी’ का असर अब सीकर जिले में भी देखने को मिला है। राज्य के राजस्व विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए फतेहपुर तहसीलदार हितेश चौधरी को तुरंत प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। जारी किए गए आदेशों के मुताबिक, निलंबन काल के दौरान तहसीलदार हितेश चौधरी का मुख्यालय अजमेर स्थित राजस्व बोर्ड रहेगा और उन्हें वहीं अपनी रोजाना उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
हालांकि, राजस्व विभाग द्वारा जारी किए गए निलंबन आदेश में कार्रवाई के स्पष्ट कारणों का लिखित उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासनिक और सियासी गलियारों में इसे फतेहपुर के बहुचर्चित ‘गोचर भूमि रजिस्ट्री कांड’ से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या था 1100 बीघा गोचर भूमि का पूरा विवाद?
यह पूरा मामला इसी साल फरवरी 2026 में तब सुर्खियों में आया था, जब फतेहपुर के कसेरा बीहड़ क्षेत्र (पिंजरापोल गौशाला से जुड़ा मामला) में स्थित लगभग 1100 बीघा बेशकीमती सरकारी गोचर भूमि की कथित रूप से अवैध रजिस्ट्री कर दी गई थी। स्थानीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे थे कि उन्होंने नियमों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए इस सार्वजनिक गोचर भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया।
इस घटना के बाद कस्बे में भारी जन आक्रोश फैल गया था। गोचर भूमि को बचाने के लिए स्थानीय नागरिक और भाजपा के कई पदाधिकारी लामबंद हो गए थे। विरोध इतना उग्र था कि फतेहपुर कस्बे का पूरा बाजार अनिश्चितकाल के लिए बंद रखना पड़ा था।
4 महीने की नाराजगी का नतीजा
स्थानीय लोग और भाजपा संगठन पिछले 4 महीनों से लगातार इस मामले में प्रत्यक्ष और कड़े एक्शन की मांग कर रहे थे।
- SDM का हुआ था तबादला: मामले के तूल पकड़ने पर करीब डेढ़ महीने पहले (13 मई को) राज्य सरकार ने तत्कालीन फतेहपुर SDM दमयंती कंवर का यहां से ट्रांसफर कर दिया था। उन्हें बीकानेर नगर निगम में डिप्टी कमिश्नर के पद पर नियुक्त किया गया था।
- भाजपाई नहीं थे संतुष्ट: भाजपा नेता SDM के इस रुटीन तबादले को सजा या ठोस कार्रवाई मानने को तैयार नहीं थे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिराने पर अड़े हुए थे।