-जांच में 53 में से 41 अधिकारियों की MSc(IT) डिग्रियां मिली फर्जी, 10 ने लिया कोर्ट स्टे, वसूली तो हुई, लेकिन FIR की जगह ‘चेतावनी’ देकर छोड़ा
जयपुर। राजस्थान राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) में फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के दम पर दो-दो विशेष वेतन वृद्धियां हासिल कर सरकारी खजाने को लाखों रुपये का चूना लगाने का बड़ा मामला उजागर हुआ है। अपेक्स बैंक में कुल 53 अधिकारियों/कार्मिकों ने एम.एससी. (आई.टी.) और इसके समकक्ष तकनीकी योग्यता दर्शाकर बैंक से विशेष वेतन वृद्धियों (Special Increments) का आर्थिक लाभ हासिल किया था। फर्जीवाड़े की गंभीर शिकायतें मिलने के बाद जब शासन व सहकारिता विभाग ने इन डिग्रियों की वैधता की पड़ताल शुरू की, तो बैंक अधिकारियों के फर्जीवाड़े का पिटारा खुल गया।
जांच रिपोर्ट, आंकड़ों का सच:-
कुल संदिग्ध अधिकारी- 53
जांच में वैध पाई गई डिग्रियां- मात्र 02 अधिकारी
कोर्ट से स्टे लेने वाले- 10 अधिकारी
फर्जी/अमान्य पाई गईं डिग्रियां- 41 अधिकारी

विभाग की कार्रवाई- वेतन वृद्धि निरस्त, मय ब्याज राशि वसूली, सर्विस बुक से डिग्री विलोपित
जांच में धांधली साबित होने के बाद सहकारिता विभाग ने कार्रवाई करते हुए 41 अधिकारियों को दी गई विशेष वेतन वृद्धियों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें भुगतान की जा चुकी राशि की मय ब्याज वसूली की गई और उनकी सेवापुस्तिका (Service Book) से इन फर्जी डिग्रियों के इंद्राज को विलोपित कर दिया गया है। “लाखों रुपये का चूना लगाने वाले अधिकारियों को केवल यह कहकर छोड़ दिया गया कि ‘भविष्य में इस प्रकार के कृत्य की पुनरावृत्ति न करें’!”
लेकिन प्रशासनिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी खजाने के साथ धोखाधड़ी और कूटचरित दस्तावेजों के जरिए संगठित अपराध करने वाले इन 41 अधिकारियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या पुलिस (FIR) कार्रवाई क्यों नहीं की गई? विभाग ने केवल भविष्य में ऐसा न करने की ‘चेतावनी पत्र’ थमाकर मामले को रफा-दफा कर दिया।
-एफआईआर और गिरफ्तारी क्यों नहीं?
अगर कोई आम नागरिक फर्जी प्रमाण पत्र पेश करता है, तो पुलिस तुरंत आईपीसी/भारतीय न्याय संहिता की धाराओं (420, 467, 468, 471) के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज देती है। अपेक्स बैंक के अधिकारियों के लिए अलग कानून क्यों?
-आला अधिकारियों की चुप्पी का राज क्या?
वर्षों तक बिना किसी सत्यापन के अधिकारियों को विशेष वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाता रहा। क्या इस पूरे खेल में शीर्ष प्रबंधकों की शह शामिल थी?
-क्या चेतावनी से रुकेगा अपराध?
फर्जी डिग्री से वित्तीय लाभ उठाने वालों को सिर्फ ब्याज सहित पैसा लौटाने की शर्त पर छोड़ देना, बाकी भ्रष्ट कर्मचारियों को भी ऐसे हथकंडे अपनाने का खुला आमंत्रण देने जैसा है। सरकार केवल लीपापोती करने के बजाय इस पूरे मामले में संलिप्त अधिकारियों एवं फर्जी डिग्रियों का सत्यापन न करने वाले जिम्मेदारों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कराए और सख्त कानूनी कार्रवाई करे, ताकि भ्रष्टाचार व फर्जीवाड़ा करने वाले अधिकारियों में राज्य सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की नीति का मैसेज जा सके।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now
