जयपुर। राजस्थान में आम जनता को स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी राहत देने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया है। चिकित्सा विभाग के बाद अब राज्य का सहकारिता विभाग भी हर जिले में जन औषधि केंद्र खोलने जा रहा है। इस योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में कम से कम एक जन औषधि केंद्र स्थापित किया जाएगा, जहां बाजार दर की तुलना में 50 से 80 प्रतिशत तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं मिलेंगी। इन केंद्रों का संचालन सहकारी उपभोक्ता भंडारों के माध्यम से किया जाएगा।
जेनेरिक दवाओं के जनक डॉ. समित शर्मा की नई मुहिम
राजस्थान में जेनेरिक दवाओं और विशेष रूप से ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना’ को धरातल पर उतारने का श्रेय वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. समित शर्मा (सहकारिता सचिव) को जाता है। वर्ष 2011 में उन्होंने सरकारी अस्पतालों में आम जनता को मुफ्त और सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराने की ऐतिहासिक शुरुआत की थी। अब एक बार फिर उनकी इस नई पहल से राज्य में सस्ती दवाओं का दायरा बढ़ने जा रहा है, जिसे स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।
41 में से 29 जिलों को मिला लाइसेंस
इस महत्वाकांक्षी योजना को गति देते हुए राज्य के पुनर्गठित 41 जिलों में से 29 जिलों को जन औषधि केंद्र खोलने के लिए लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। सहकारिता सचिव डॉ. समित शर्मा ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर इन केंद्रों के लिए उपयुक्त स्थान आवंटित करने के निर्देश दिए हैं।
ये केंद्र मुख्य रूप से जिला अस्पतालों या जिला उपभोक्ता भंडार परिसरों में स्थापित किए जाएंगे। राजधानी जयपुर में कॉनफैड (CONFED) द्वारा सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के चरक भवन में नया जन औषधि केंद्र खोला जा रहा है, जिसकी तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं।
जेनेरिक और ब्रांडेड दवाओं में क्या है अंतर?
आम जनता के मन में अक्सर जेनेरिक दवाओं को लेकर संशय रहता है, जिसे विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है:
- समान प्रभाव और गुणवत्ता: जेनेरिक दवाएं किसी ब्रांडेड दवा का पेटेंट समाप्त होने के बाद बनाई जाती हैं। ये पूरी तरह सुरक्षित, प्रभावी और समान गुणवत्ता वाली होती हैं।
- कीमत में भारी अंतर: ब्रांडेड दवाएं कंपनियां अपने विशेष ट्रेडमार्क नाम से बेचती हैं। अनुसंधान, विज्ञापन और मार्केटिंग पर भारी खर्च के कारण ये महंगी होती हैं। इसके विपरीत, जेनेरिक दवाएं अपने मूल सॉल्ट या फॉर्मूले के नाम से बेची जाती हैं, जिससे इनकी कीमत 50% से 80% तक कम होती है।
- दिखावट में बदलाव: ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं की पैकिंग, रंग या आकार में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन शरीर पर उनका असर बिल्कुल एक जैसा होता है।
दवाओं और सर्जिकल उत्पादों की संख्या में भारी बढ़ोतरी
वर्तमान में जयपुर के SMS अस्पताल और झुंझुनूं में ही जन औषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही अन्य जिलों में भी इसकी शुरुआत होगी। इस विस्तार के साथ ही कॉनफैड के मेडिकल स्टोर्स पर उपलब्ध दवाओं की संख्या 18 से बढ़कर सीधे 250 तक पहुंच गई है।
बड़ी राहत: अब इन केंद्रों पर न केवल अधिकांश आवश्यक दवाएं (Essential Medicines) उपलब्ध होंगी, बल्कि विभिन्न प्रकार के सर्जिकल आइटम भी बेहद किफायती दरों पर मिलेंगे। इससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का चिकित्सा पर होने वाला जेब का खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।