करौली और सवाई माधोपुर के लिए बड़ी राहत, चंबल पेयजल परियोजना को मिली मंजूरी

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जयपुर/सवाई माधोपुर। राजस्थान सरकार ने पूर्वी राजस्थान के जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को बड़ी राहत देते हुए करौली और सवाई माधोपुर जिलों के लिए चंबल आधारित विशाल पेयजल परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 2,853 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के माध्यम से दोनों जिलों के 1,426 गांवों और 11 कस्बों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना से लगभग 14 लाख लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

राज्य सरकार के अनुसार यह योजना क्षेत्र में लंबे समय से बनी पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। वर्तमान में इन इलाकों के अधिकांश गांव भूजल स्रोतों पर निर्भर हैं, जहां जल स्तर लगातार गिर रहा है और कई स्थानों पर पानी की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है।

14 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

परियोजना के तहत करौली और सवाई माधोपुर जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों तक चंबल नदी का पानी पहुंचाया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 14 लाख लोगों को नियमित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

विशेष रूप से ऐसे गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गंभीर रूप ले लेता है और लोगों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ता है।

1426 गांव और 11 कस्बे होंगे शामिल

योजना के दायरे में दोनों जिलों के कुल 1,426 गांव और 11 कस्बे शामिल किए गए हैं। इसके लिए बड़े स्तर पर पाइपलाइन नेटवर्क, जलाशय, पंपिंग स्टेशन और जल शोधन संयंत्र विकसित किए जाएंगे।

परियोजना पूरी होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर तक पेयजल पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति होने की संभावना है।

चंबल नदी बनेगी मुख्य जल स्रोत

इस महत्वाकांक्षी योजना में चंबल नदी को मुख्य जल स्रोत बनाया गया है। चंबल राजस्थान की उन प्रमुख नदियों में शामिल है जहां अपेक्षाकृत पर्याप्त जल उपलब्ध रहता है। इसी कारण राज्य सरकार विभिन्न जिलों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए चंबल आधारित परियोजनाओं पर लगातार काम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सतही जल स्रोतों के उपयोग से भूजल दोहन में कमी आएगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

जल गुणवत्ता की समस्या से भी मिलेगी राहत

करौली और सवाई माधोपुर के कई ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोराइड, लवणता और अन्य जल गुणवत्ता संबंधी समस्याएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। चंबल आधारित पेयजल परियोजना लागू होने के बाद लोगों को उपचारित और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।

इससे जलजनित बीमारियों में कमी आने और ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

रोजगार और विकास को भी मिलेगा बढ़ावा

परियोजना के निर्माण चरण में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। पाइपलाइन बिछाने, निर्माण कार्य, तकनीकी सेवाओं और रखरखाव गतिविधियों में बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

इसके अलावा पर्याप्त जल उपलब्धता से क्षेत्र में औद्योगिक, व्यावसायिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।

पूर्वी राजस्थान में जल प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम

राजस्थान सरकार पिछले कुछ वर्षों से जल संकट से निपटने के लिए विभिन्न पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं पर काम कर रही है। चंबल पेयजल योजना को पूर्वी राजस्थान के जल प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, योजना के सफल क्रियान्वयन से करौली और सवाई माधोपुर के हजारों परिवारों को लंबे समय तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा और क्षेत्र की जल निर्भरता में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।


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