जयपुर: प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए शुक्रवार देर रात राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के 178 अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस फेरबदल में कई मंत्रियों के विशिष्ट सहायक (SA) बदले गए हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा वरिष्ठ अफसर डॉ. विभु कौशिक की नियुक्ति को लेकर हो रही है। लंबे समय से विवादों और चर्चाओं में रहे डॉ. विभु कौशिक को अब स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का विशिष्ट सहायक (SA) नियुक्त किया गया है।
इस सूची में केवल नए तबादले ही नहीं किए गए, बल्कि पूर्व में हुए कुछ अधिकारियों के तबादला आदेशों को निरस्त भी किया गया है। इनमें 13 मई को स्थानांतरित किए गए पुष्कर कुमार मित्तल सहित चार अधिकारी और सितंबर 2025 में स्थानांतरित किए गए मोहम्मद ताहिर का नाम शामिल है।
आईएएस बनाम आरएएस विवाद: बिना मंत्री की मंजूरी चार्जशीट थमाने पर खड़े हुए थे गंभीर सवाल
स्वास्थ्य मंत्री के विशिष्ट सहायक बने डॉ. विभु कौशिक बीते साल 2025 में अचानक सुर्खियों में आ गए थे। उस समय वे स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत एक चिकित्सा विंग में विशेष कर्तव्य पर तैनात अधिकारी (OSD) के रूप में काम कर रहे थे। विवाद तब शुरू हुआ जब 50 दिनों के चिकित्सा अवकाश से लौटने के तुरंत बाद वहां की प्रबंध निदेशक (IAS अधिकारी) ने उन्हें एक गंभीर आरोप पत्र (चार्जशीट) थमा दिया और उनके निलंबन की सिफारिश कार्मिक विभाग को भेज दी।
इस कार्रवाई पर डॉ. कौशिक ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था और प्रशासनिक नियमों पर सवाल उठाए थे। उनका तर्क था कि संबंधित विभाग के कैबिनेट मंत्री से फाइल को स्वीकृत कराए बिना, एक आईएएस अधिकारी सीधे तौर पर आरएएस अधिकारी को चार्जशीट कैसे जारी कर सकती है? इसके अलावा, प्रबंधन ने उनसे बीमारी और फिटनेस प्रमाण पत्र भी मांगे थे, न देने पर छुट्टियां रद्द करने की चेतावनी दी थी।

राज्य बीमा विभाग से सीधे मंत्री के मुख्य नीतिगत सहयोगी के पद पर पहुंचे डॉ. कौशिक
प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि डॉ. विभु कौशिक को अपने साथ जोड़ने के लिए स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर काफी समय से प्रयासरत थे। वे उच्च स्तर पर लगातार डॉ. कौशिक को अपना विशिष्ट सहायक बनाने की सिफारिश कर रहे थे। इस नई सूची के आने के बाद आखिरकार उनकी पसंद पर मुहर लग गई है। इस आदेश से पहले डॉ. कौशिक राज्य बीमा और प्रावधान नीति विभाग में अतिरिक्त निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब स्वास्थ्य विभाग की बारीकियों और पुराने अनुभवों को देखते हुए उन्हें सीधे मंत्री का विशिष्ट सहायक बनाया गया है।
मौसमी बीमारियों की रिव्यू मीटिंग के दौरान सीनियर अधिकारियों से हुई थी तीखी बहस
डॉ. विभु कौशिक का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2025 के इस बड़े घटनाक्रम से ठीक कुछ समय पहले, स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री ए. राठौड़ के साथ भी उनका सीधा वैचारिक टकराव हो गया था। प्रदेश में मौसमी बीमारियों की रोकथाम और व्यवस्थाओं को लेकर बुलाई गई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दोनों अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई थी। इस टकराव के बाद से ही वे लगातार चर्चा में बने हुए थे और अब सीधे कैबिनेट मंत्री के मुख्य सहयोगी बनकर लौटे हैं।
बलवंत सिंह लिग्री और चंदन दुबे सहित कई अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव
EXPOSE NOW ने किया था ‘सिफारिशी लेटर’ का सबसे बड़ा खुलासा
दरअसल, चिकित्सा विभाग जैसे महत्वपूर्ण महकमे में विशिष्ट शासन सचिव के पद पर तैनात बलवंत सिंह लिग्री के कामकाज को लेकर सरकार को कई तरह की गंभीर खामियां मिल रही थीं। ‘Expose Now’ ने इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाते हुए सिलसिलेवार तरीके से खबरें प्रकाशित की थीं।
इस इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब ‘Expose Now’ ने स्वास्थ्य मंत्री द्वारा वर्तमान शासन सचिव के लिए की गई पैरवी और सिफारिश के आधिकारिक लेटर (Recommendation Letter) को सबूत के साथ उजागर कर दिया। इस पुख्ता खबर के लाइव होते ही प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई।
सरकार के इस नए आदेश के तहत न केवल स्वास्थ्य मंत्री, बल्कि कई अन्य मंत्रियों के सचिवालय स्टाफ को भी बदला गया है।
- स्वास्थ्य मंत्रालय: स्वास्थ्य मंत्री के पूर्व विशिष्ट सहायक बलवंत सिंह लिग्री को अब स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड में कार्यकारी निदेशक के पद पर भेजा गया है।
- ग्रामीण विकास मंत्रालय: राज्यपाल के उप सचिव मुकेश कुमार कलाल का तबादला करके उन्हें ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ओटाराम देवासी का नया विशिष्ट सहायक नियुक्त किया गया है। वहीं, देवासी के पूर्व विशिष्ट सहायक राकेश कुमार को अब सीकर में भूप्रबंध अधिकारी बनाया गया है।
- पशुपालन मंत्रालय: पशुपालन और डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत के विशिष्ट सहायक चंदन दुबे को अब राजभवन भेजा गया है, जहां वे राज्यपाल के उप सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे। हालांकि, मंत्री जोराराम कुमावत के नए विशिष्ट सहायक के नाम की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है।
प्रशासनिक विश्लेषण: इस थोक तबादला सूची से साफ है कि सरकार मैदानी पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ मंत्रियों और नौकरशाहों के बीच बेहतर सामंजस्य स्थापित करना चाहती है। विवादों में रहे अधिकारियों को मंत्रियों की पसंद के आधार पर नियुक्त करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।