जोधपुर/बाड़मेर। बाड़मेर के बहुचर्चित कमलेश प्रजापति एनकाउंटर मामले में जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आईपीएस अधिकारी आनंद शर्मा समेत 24 पुलिस अधिकारियों और जवानों को राहत दी है। सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों में संज्ञान लेने के आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि पुलिस की ओर से की गई फायरिंग आत्मरक्षा और एक पुलिसकर्मी की जान बचाने के लिए की गई थी। ऐसे में इस घटना को फर्जी एनकाउंटर नहीं माना जा सकता।
2021 में हुआ था बहुचर्चित एनकाउंटर
22 अप्रैल 2021 को बाड़मेर के सदर थाना क्षेत्र में पुलिस और कमलेश प्रजापति के बीच मुठभेड़ हुई थी, जिसमें कमलेश की मौत हो गई थी। घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।
तत्कालीन पचपदरा विधायक मदन प्रजापत और समाज के लोगों की मांग पर राज्य सरकार ने 31 मई 2021 को मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी थी। इसके बाद सीबीआई ने 5 जुलाई 2021 को बाड़मेर सदर थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस ने बताया था जवाबी कार्रवाई का मामला
एनकाउंटर के अगले दिन तत्कालीन डीएसपी पुष्पेंद्र आढ़ा ने सदर थाने में दर्ज रिपोर्ट में बताया था कि पुलिस टीम कमलेश प्रजापति को पकड़ने के लिए सेंट पॉल स्कूल के पीछे स्थित एक मकान पर पहुंची थी।
रिपोर्ट के अनुसार, कमलेश ने अपनी इसुजु एसयूवी से लोहे का गेट तोड़ दिया और पुलिस टीम पर वाहन चढ़ाने का प्रयास करते हुए भागने लगा। इसके बाद पुलिस कमांडो ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की, जिसमें कमलेश की मौत हो गई। घटना के सीसीटीवी फुटेज भी सामने आए थे।
सर्च ऑपरेशन में हथियार और नकदी बरामद
एनकाउंटर के बाद कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान 59.69 लाख रुपये नकद, 11 लग्जरी वाहन, पांच अवैध पिस्टल, नौ मैगजीन, 121 कारतूस, 2.360 किलोग्राम अफीम का दूध, 1.715 किलोग्राम डोडा-पोस्त, 13 मोबाइल फोन, चार डोंगल और एक एटीएम कार्ड बरामद किए गए थे।
CBI ने दी थी पुलिस को क्लीन चिट
लंबी जांच और घटनास्थल पर फायरिंग सीन को दोबारा तैयार करने के बाद सीबीआई ने अदालत में नेगेटिव क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी।
जांच एजेंसी ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि कमलेश प्रजापति फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। सीबीआई ने पुलिस कार्रवाई को उचित मानते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
पत्नी ने क्लोजर रिपोर्ट को दी थी चुनौती
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ मृतक की पत्नी जसोदा ने 28 मार्च 2023 को अदालत में याचिका दायर की थी। याचिका में एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे।
याचिकाकर्ता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया था कि मामले में कुछ अहम व्यक्तियों से पूछताछ नहीं की गई और घर पर लगे सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर के फुटेज डिलीट कर दिए गए।
ट्रायल कोर्ट ने लिया था हत्या का संज्ञान
एसीजेएम (सीबीआई) कोर्ट ने 16 अप्रैल 2025 को सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर आईपीएस आनंद शर्मा, कालूराम रावत, आरपीएस रजत विश्नोई, पुष्पेंद्र आढ़ा समेत 24 पुलिस अधिकारियों और जवानों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश के आरोपों में संज्ञान लेने का आदेश दिया था।
इसके खिलाफ पुलिस अधिकारियों ने जोधपुर महानगर सेशन कोर्ट में निगरानी याचिका दायर की थी।
सेशन कोर्ट ने माना- पुलिस के पास तत्काल कार्रवाई के अलावा विकल्प नहीं था
सेशन न्यायाधीश दिनेश त्यागी की अदालत ने सीसीटीवी फुटेज, एफएसएल रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कहा कि कमलेश प्रजापति ने भागने के दौरान पुलिस टीम की ओर वाहन बढ़ाया था।
अदालत ने माना कि इस दौरान हेड कांस्टेबल मेहाराम वाहन के टायर के नीचे दब गए थे। ऐसे में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के पास तत्काल जवाबी कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
आत्मरक्षा में हुई फायरिंग, सभी 24 पुलिसकर्मियों को राहत
सेशन कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हेड कांस्टेबल मेहाराम की जान बचाने और वाहन को रोकने के लिए कमांडो दिनेश ने गाड़ी के टायर और कमलेश के पैरों की ओर गोलियां चलाई थीं।
अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस कार्रवाई को आत्मरक्षा में उठाया गया कदम माना और ट्रायल कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए आईपीएस आनंद शर्मा समेत सभी 24 पुलिस अधिकारियों और जवानों को राहत प्रदान कर दी।