जयपुर। राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) में सामने आए कथित घोटाले की जांच का दायरा अब और भी व्यापक होने जा रहा है। अब तक केवल फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों (Fake Experience Certificates) की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने अब फर्जी भुगतान के मामलों और ठेकेदारों के रजिस्ट्रेशन प्रकरणों को भी अपनी रडार पर ले लिया है।
ACB ने पिछले कुछ दिनों में कई संदिग्ध मामलों को लेकर जलदाय विभाग (PHED) से रिकॉर्ड तलब किया है। जांच की यह आंच तेज होने से विभाग के 10 से ज्यादा बड़े ठेकेदारों और 200 से अधिक इंजीनियरों की मुश्किलें अचानक बढ़ गई हैं।
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बांसवाड़ा का मामला: बिना पाइप 3.48 करोड़ का पेमेंट
जेजेएम चीफ इंजीनियर की रिपोर्ट के अनुसार, बांसवाड़ा के 47 गांवों की पेयजल परियोजना में भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी गईं। यहां मैसर्स जीए इंफ्रा फर्म को बिना पाइप की आपूर्ति किए ही 3 करोड़ 48 लाख रुपए का भारी-भरकम भुगतान कर दिया गया। इस गंभीर मामले में ACB ने तत्कालीन एक्सईएन (XEN) धन्नाराम चौहान, एईएन (AEN) श्यामलाल चरपोटा, जेईएन (JEN) नितिश उपाध्याय, जेईएन पुरुषोत्तम परमार और फर्म के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इन जिम्मेदार इंजीनियरों को चार्जशीट भी थमा दी गई है।
PHED मंत्री का सख्त आदेश: जांच के बाद ही होगा भुगतान
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पेयजल स्कीम और प्रोजेक्ट्स को लेकर विभाग की क्वालिटी कंट्रोल व विजिलेंस विंग में वर्तमान में 100 से अधिक मामलों की सघन जांच चल रही है।
लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण पिछले दिनों विभाग के ठेकेदारों ने पेयजल सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी थी। इसके बाद सरकार ने भुगतान के आदेश तो दिए हैं, लेकिन जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी प्रकरणों में पूरी जांच-पड़ताल होने के बाद ही ठेकेदारों का बकाया भुगतान किया जाएगा।
ACB की इस सख्ती से तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में PHED के कई बड़े अधिकारी और ठेकेदार सलाखों के पीछे नजर आ सकते हैं।