जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में जनसंख्या, आवासीय स्थिति और खाली पड़े मकानों की वास्तविक संख्या का पता आगामी जनगणना 2027 के जरिए चलेगा। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई देश की पहली डिजिटल जनगणना के तहत जयपुर सहित पूरे राजस्थान में मकानों और परिवारों का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा रहा है।
जनगणना का पहला चरण ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ 16 मई से 14 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस चरण में प्रत्येक मकान की स्थिति, उपयोग, सुविधाएं और उसमें रहने वाले परिवारों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण शुरू होगा।

खाली मकानों की होगी अलग पहचान
जनगणना के दौरान गणनाकर्मी यह दर्ज करेंगे कि मकान में कोई परिवार रह रहा है या नहीं। यदि कोई मकान लंबे समय से खाली है, किराए पर उपलब्ध है, निर्माणाधीन है या किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग में लिया जा रहा है, तो उसकी अलग श्रेणी बनाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के बीच जयपुर में खाली मकानों की संख्या का सटीक आंकड़ा शहरी नियोजन, आवास नीति और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। हाल के वर्षों में शहर के बाहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आवासीय परियोजनाएं विकसित हुई हैं, जिससे कई इलाकों में खाली आवासों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
पहली बार पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
यह राजस्थान की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी। गणनाकर्मी टैबलेट और मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे, जबकि नागरिकों को स्वयं ऑनलाइन जानकारी भरने के लिए ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ की सुविधा भी दी गई है। हालांकि, ऑनलाइन जानकारी जमा करने के बाद भी अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा।
जनगणना में मकान निर्माण सामग्री, पेयजल, बिजली, इंटरनेट, शौचालय, रसोई ईंधन और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुल 33 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जाएगी। इसके साथ ही परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़े भी एकत्र किए जाएंगे।
प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक
जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए राजस्थान सरकार ने 1 जनवरी 2026 से नए जिले, तहसील, नगर निकाय या प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव पर रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध जनगणना प्रक्रिया पूरी होने तक लागू रहेगा।
शहरी विकास की योजनाओं में मिलेगी मदद
जयपुर की आबादी, आवासीय घनत्व और खाली मकानों से जुड़े आंकड़े भविष्य की शहरी विकास योजनाओं, परिवहन नेटवर्क, जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और आवास योजनाओं के लिए आधार तैयार करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक डेटा के आधार पर सरकार स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और आवासीय योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकेगी।
जनगणना 2027 के आंकड़े न केवल जयपुर की वर्तमान तस्वीर सामने लाएंगे, बल्कि आने वाले दशक में शहर की विकास रणनीति तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।