जयपुर/झुंझुनूं। राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना यानी ‘आरजीएचएस’ (RGHS) का लाभ उठा रहे प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके आश्रितों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने योजना के तहत बाह्य चिकित्सा परामर्श (OPD) और दवा वितरण प्रणाली को लेकर एक नई और सख्त गाइडलाइन जारी की है। आगामी 15 जून 2026 से प्रदेश में डॉक्टर के घर या उनके निजी क्लीनिक पर दी गई हाथ से लिखी पर्ची (Prescription) पर मुफ्त दवाएं नहीं मिल सकेंगी। अब डॉक्टरों को अस्पताल परिसर से बाहर परामर्श देने पर आरजीएचएस पोर्टल के विशेष मॉड्यूल का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही चिकित्सा विभाग ने प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती बरतते हुए झुंझुनूं सहित प्रदेश के सभी जिला स्तरीय चिकित्सा अधिकारियों (CMHO और PMO) की छुट्टियों को लेकर भी नए कड़े निर्देश जारी किए हैं।

क्या है नया नियम और ‘OPD at Residence’ मॉड्यूल?
आरजीएचएस के परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा जारी नए परिपत्र (Circular) के अनुसार, यदि कोई भी एम्पैनल्ड (संबद्ध) या डीम्ड अस्पताल का पंजीकृत डॉक्टर किसी लाभार्थी को अपने सरकारी अस्पताल परिसर से बाहर—जैसे अपने निजी आवास, निजी क्लीनिक या किसी अन्य स्थान पर परामर्श देता है, तो उसे अनिवार्य रूप से आरजीएचएस पोर्टल पर उपलब्ध “OPD at Residence” मॉड्यूल का उपयोग करना होगा।
डॉक्टरों को इस मॉड्यूल के जरिए ऑनलाइन परामर्श पर्ची (Digital Prescription) जनरेट करनी होगी। अगर डॉक्टर ऐसा नहीं करते हैं, तो मरीज को किसी भी आरजीएचएस अनुमोदित फार्मेसी या मेडिकल स्टोर से निशुल्क दवाइयां जारी नहीं की जाएंगी। 15 जून के बाद से किसी भी डॉक्टर का निजी लेटरपैड या हाथ से लिखी गई पर्ची पूरी तरह अमान्य मानी जाएगी।
मेडिकल स्टोरों पर भी होगी सख्त कार्रवाई
नए नियमों में दवा विक्रेताओं के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर संचालक ने बिना ऑनलाइन मॉड्यूल से जनरेट हुई पर्ची के हस्तलिखित पर्ची पर दवा दी, तो उनके खिलाफ आरजीएचएस नियमों के तहत सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों में भी असमंजस और भय का माहौल है।
धरातल की हकीकत: क्यों उठ रहे हैं इस आदेश पर सवाल?
सरकार भले ही इस कदम को पारदर्शिता और बेहतर डॉक्यूमेंटेशन का जरिया बता रही हो, लेकिन कर्मचारी संगठनों और आम जनता के बीच इस आदेश को लेकर भारी आक्रोश है। इसे व्यावहारिक धरातल पर बेहद जटिल और प्रताड़ित करने वाला नियम बताया जा रहा है, जिसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- सर्वर डाउन और बुजुर्ग पेंशनर्स की आफत: आरजीएचएस पोर्टल पर सर्वर डाउन रहने की समस्या आम है। जब बड़े अस्पतालों में मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, तो डॉक्टरों के घरों पर इंटरनेट या तकनीकी खराबी होने पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग पेंशनर्स कहां भटकेंगे?
- डॉक्टरों की बेरुखी का खतरा: सरकारी अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों के क्लीनिक और आवास पर शाम को मरीजों की भारी भीड़ होती है। समय की कमी के कारण हर मरीज के लिए पोर्टल लॉगिन करना और ऑनलाइन पर्ची बनाना डॉक्टरों के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। आशंका है कि इस झंझट से बचने के लिए कई नामी डॉक्टर आरजीएचएस मरीजों को निजी स्तर पर देखना ही बंद कर सकते हैं।
- आपातकालीन स्थिति में जनता पर मार: यदि किसी आपातकालीन स्थिति में रात के समय किसी मरीज को दवा की सख्त जरूरत है और सर्वर न चलने के कारण डॉक्टर ऑनलाइन पर्ची नहीं बना पाता, तो मेडिकल स्टोर वाले दवा देने से मना कर देंगे। ऐसे में मरीज सिस्टम की इस लड़ाई में पिसने को मजबूर होगा।

कर्मचारियों का सुलगता सवाल: कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जब हर महीने उनकी सैलरी और पेंशन से आरजीएचएस का प्रीमियम काटा जा रहा है, तो स्वास्थ्य लाभ को सुगम बनाने के बजाय हर महीने नए-नए ‘तुगलकी’ नियम थोपकर इसे जटिल क्यों बनाया जा रहा है?
झुंझुनूं चिकित्सा विभाग का एक और कड़ा आदेश: अब निदेशालय से मंजूर होगी अफसरों की छुट्टी
इस बड़े तकनीकी बदलाव के बीच, झुंझुनूं चिकित्सा विभाग से एक और बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। नए निर्देशों के अनुसार, अब सीएमएचओ (CMHO), पीएमओ (PMO) और जिला अस्पताल प्रभारियों सहित कोई भी जिला स्तरीय चिकित्सा अधिकारी बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेगा और न ही छुट्टी ले सकेगा।
अब तक जोन के संयुक्त निदेशक (Joint Director) अपने स्तर पर इन अधिकारियों की छुट्टियां मंजूर कर दिया करते थे, लेकिन अब यह अधिकार उनसे वापस ले लिया गया है। अब जिला स्तरीय अधिकारियों को अवकाश लेने के लिए सीधे निदेशालय (जयपुर) से मंजूरी लेनी होगी। बिना अनुमति के अवकाश पर जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
ब्यूरो रिपोर्ट, Expose Now