खुद को ज्यादा ‘काबिल’ दिखाना JEN को पड़ा भारी: मानव भारती यूनिवर्सिटी की फर्जी M.Tech डिग्री के साथ जूनियर इंजीनियर गिरफ्तार

जयपुर/उदयपुर। राजस्थान में फर्जी डिग्रियों के सहारे सरकारी नौकरी और पदोन्नति पाने वालों के खिलाफ पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी एमटेक (M.Tech) डिग्री के आधार पर सरकारी सेवाओं में लाभ लेने वाले जलदाय विभाग के एक जूनियर इंजीनियर (JEN) को गिरफ्तार किया है।

आरोपी की पहचान दुर्गाशंकर मेनारिया(Durgashankar Menaria) (निवासी: ग्राम वाना, तहसील भींडर, जिला उदयपुर) के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया है कि जिस पद के लिए उसने आवेदन किया था, उसके लिए एमटेक की डिग्री अनिवार्य ही नहीं थी, लेकिन खुद को अधिक योग्य दिखाने की चाहत ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

ऐसे खुला फर्जीवाड़े का राज

SOG के एडीजी (ADG) विशाल बंसल (Vishan Bansal) ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि साल 2018-19 में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा ‘समूह अनुदेशक/सर्वेयर/सहायक शिक्षुता सलाहकार ग्रेड-द्वितीय’ भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे।

  • दुर्गाशंकर मेनारिया ने इस भर्ती में आवेदन किया और अपनी शैक्षणिक योग्यता में मानव भारती विश्वविद्यालय, सोलन (हिमाचल प्रदेश) से प्राप्त एमटेक (इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम) की डिग्री संलग्न की।
  • जब चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद RPSC ने दस्तावेजों का सत्यापन (Document Verification) शुरू किया, तो एमटेक की डिग्री संदिग्ध पाई गई।
  • इसके बाद SOG ने संबंधित विश्वविद्यालय से इस डिग्री का सत्यापन कराया, जिसमें विश्वविद्यालय ने स्पष्ट कर दिया कि यह डिग्री आरोपी दुर्गाशंकर मेनारिया के नाम से कभी जारी ही नहीं की गई थी।

खुद को ज्यादा ‘काबिल’ दिखाना पड़ा भारी

SOG की जांच में सबसे हैरान करने वाला पहलू यह सामने आया कि RPSC द्वारा निकाली गई इस भर्ती के लिए केवल स्नातक (Graduation) की योग्यता आवश्यक थी। इस पद के लिए एमटेक की डिग्री की कोई अनिवार्यता नहीं थी। इसके बावजूद आरोपी ने चयन समिति के सामने खुद को अधिक योग्य और तकनीकी रूप से सक्षम दर्शाने के उद्देश्य से यह फर्जी एमटेक डिग्री अपने आवेदन के साथ लगा दी थी।

फर्जी डिग्री के सहारे हासिल किया 5 साल का अनुभव

एसओजी की पूछताछ में आरोपी के कारनामों की एक और परत खुली है।

  • आरोपी दुर्गाशंकर ने केवल RPSC भर्ती में ही इस फर्जी डिग्री का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि इसी डिग्री के आधार पर उसने साल 2015 से 2020 तक माधव विश्वविद्यालय, पिंडवाड़ा (सिरोही) (Madhav University, Pindwara (Sirohi) में सहायक तकनीकी अधिकारी के रूप में नौकरी भी की।
  • वहां से प्राप्त अनुभव प्रमाण पत्र को भी उसने अपनी सरकारी नौकरी की योग्यता में शामिल कर लिया।

इस पूरे मामले की शिकायत तकनीकी शिक्षा निदेशालय, जोधपुर की ओर से एसओजी थाने में दर्ज कराई गई थी। जांच पूरी होने के बाद एसओजी ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से अदालत ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।

अब दलालों और अन्य डिग्रियों की हो रही है जांच

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद एसओजी का जांच दायरा और बढ़ गया है। पुलिस अब निम्नलिखित बिंदुओं पर गहराई से पड़ताल कर रही है:

  1. आरोपी ने यह फर्जी डिग्री किस दलाल या विश्वविद्यालय के किन भ्रष्ट कर्मचारियों के माध्यम से बनवाई?
  2. इस फर्जी डिग्री के लिए दलालों को कितनी रकम चुकाई गई?
  3. इसके अलावा, आरोपी की बीटेक (B.Tech) और अन्य सभी शैक्षणिक डिग्रियों का भी संबंधित विश्वविद्यालयों से दोबारा सत्यापन (Verification) कराया जा रहा है ताकि यह साफ हो सके कि उसकी अन्य डिग्रियां असली हैं या नहीं।
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