बारां में ACB का बड़ा धमाका: कतरनी और बंधी वसूल रहे ट्रैफिक इंचार्ज (TI) चन्द्रप्रकाश बैरवा ₹7,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार

बारां/कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की बारां इकाई ने शहर में यातायात के नाम पर चल रही अवैध वसूली और बंधी के बड़े खेल को ध्वस्त कर दिया है। एसीबी की टीम ने कोटा रोड स्थित एफसीआई (FCI) गोदाम के सामने ‘जय श्री महाकाल जूस सेंटर’ पर जाल बिछाकर बारां के ट्रेफिक इंचार्ज (यातायात शाखा प्रभारी) एवं उप निरीक्षक (SI) चन्द्रप्रकाश बैरवा को परिवादी से ₹7,000 की मासिक बंधी (रिश्वत) लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

कार्रवाई की भनक लगते ही आरोपी उप निरीक्षक ने बचने के लिए बहाना बनाया कि उसने रिश्वत नहीं ली, बल्कि परिवादी ने जबरदस्ती उसकी जेब में पैसे ठूंस दिए हैं, लेकिन एसीबी के वैज्ञानिक केमिकल टेस्ट ने मौके पर ही थानेदार के झूठ की हवा निकाल दी।

पहले ऐंठे ₹27,000… फिर बेरोकटोक ट्रैक्टर चलाने के लिए मांगी ‘मासिक बंधी’

यह मामला ट्रैक्टर से बजरी परिवहन और किराये का कार्य करने वाले कोटा के सांगोद (हाल किरायेदार, विद्या कॉलोनी बारां) निवासी परिवादी राजेंद्र गोचर से जुड़ा है । परिवादी ने शिकायत दर्ज कराई कि कुछ दिन पहले जब वह मांगरोल से बारां बजरी लेकर आ रहा था, तो रास्ते में उसका ट्रैक्टर खराब हो गया था।

उसी दौरान ट्रैफिक इंचार्ज चन्द्रप्रकाश बैरवा वहां पहुंचे और ट्रैक्टर को अवैध रूप से जब्त करने की धमकी देकर मौके पर ही ₹27,000 की भारी रिश्वत वसूल कर ट्रैक्टर को छोड़ा। शातिर अधिकारी इतने पर ही नहीं रुका; उसने ट्रैक्टर को आगे बिना किसी रुकावट (बेरोकटोक) चलाने के एवज में ₹10,000 प्रति महीना की ‘मासिक बंधी’ मांगना शुरू कर दिया और न देने पर दोबारा ट्रैक्टर सीज करने की धमकी दी।

स्टेडियम और प्रताप चौकी पर हुआ घूस मांग का सत्यापन

रिश्वत न देने की इच्छा के कारण परिवादी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की हेल्पलाइन नंबर 1064 पर संपर्क किया, जिसके बाद 25 मई 2026 को बारां एसीबी के उप अधीक्षक प्रेमचन्द के समक्ष लिखित शिकायत पेश की गई।

26 मई 2026 को सुबह आरोपी टीआई ने परिवादी को फोन कर प्रताप चौकी पर बुलाया । एसीबी टीम ने कांस्टेबल विक्रम सिंह की निगरानी में परिवादी को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर (डीवीआर) देकर भेजा। प्रताप चौकी के बाहर हुई बातचीत में टीआई चन्द्रप्रकाश ने ₹10,000 की मांग दोहराई, लेकिन परिवादी द्वारा काफी हाथ-पैर जोड़ने और गिड़गिड़ाने पर वह ₹7,000 मासिक बंधी लेने पर सहमत हो गया और अगले दिन पैसे लेकर आने को कहा, जो रिकॉर्डर में दर्ज हो गया।

तीन दिन तक ‘मिशन’ का नाटक कर टालता रहा आरोपी

27 मई 2026 को एसीबी ने स्वतंत्र गवाहों (कृषि अधिकारी हमेश कुमार मीणा और कनिष्ठ सहायक देवेंद्र सिंह यादव) की मौजूदगी में केमिकल पाउडर लगे ₹7,000 तैयार किए। परिवादी नोट लेकर दफ्तर गया, लेकिन आरोपी ने फोन नहीं उठाया।

इसके बाद 29 और 30 मई को भी परिवादी ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया, तो आरोपी टीआई ने कहीं ‘मिशन’ पर बाहर होने और काफी व्यस्त होने का नाटक रचकर फ्री होने पर खुद कॉल करने की बात कही और मिलने से टालमटोल करता रहा। इस कारण एसीबी टीम तीन दिनों तक लगातार जाल बिछाकर आरोपी के फोन का इंतजार करती रही।

जूस सेंटर पर साफी बांधकर परिवादी ने किया इशारा, दबोचे गए थानेदार

31 मई 2026 की सुबह करीब 10:11 बजे टीआई चन्द्रप्रकाश ने परिवादी को रास्ते में एफसीआई गोदाम के सामने देखा और कड़क लहजे में तुरंत ₹7,000 लेकर आने को कहा। एसीबी टीम तुरंत सुमेरू बिल्डिंग के पास एक्टिव हुई और परिवादी की शर्ट की जेब में केमिकल युक्त नोट रखवाकर उसे रवाना किया गया।

दोपहर करीब 11:02 बजे परिवादी एफसीआई गोदाम के सामने स्थित ‘जय श्री महाकाल जूस सेंटर’ की दुकान पर वर्दी पहने टीआई चन्द्रप्रकाश से मिला। जैसे ही परिवादी ने ₹7,000 सौंपे, आरोपी ने पैसे लेकर अपनी खाकी पैन्ट की बांयी जेब में रख लिए । पैसे मिलते ही परिवादी ने सिर पर साफी (अंगोछा) बांधकर एसीबी को पूर्व निर्धारित गोपनीय इशारा कर दिया। इशारा मिलते ही उप अधीक्षक प्रेमचन्द की टीम ने जूस सेंटर को घेर लिया और ट्रैफिक इंचार्ज को दबोच लिया।

पढ़े पूरी FIR..

मर्यादापूर्वक खुलवाई गई खाकी पैन्ट; हाथ धुलवाते ही लाल घोल हुआ ‘गुलाबी’

रिश्वत का लेनदेन आम रोड पर होने और अचानक भारी भीड़ जुटने के कारण एसीबी टीम सुरक्षा के मद्देनजर आरोपी को सरकारी और निजी वाहनों से तुरंत सदर थाने लेकर आई। वहां कम्प्यूटर कक्ष में जब सोडियम कार्बोनेट के रंगहीन घोल में आरोपी टीआई के बांये हाथ की उंगलियों को डुबोया गया, तो घोल का रंग तुरंत हल्का गुलाबी हो गया।

इसके बाद आरोपी उप निरीक्षक की खाकी पैन्ट को मर्यादापूर्वक खुलवाकर उन्हें दूसरा पजामा पहनाया गया। पैन्ट की बांयी जेब को जब केमिकल के पारदर्शी घोल में उलटकर धोया गया, तो पूरा घोल गहरा गुलाबी हो गया। गवाह देवेंद्र सिंह ने जेब से पूरे ₹7,000 के वही नम्बरी नोट बरामद किए जिनका मिलान फर्द से हूबहू हो गया।

आवाज का नमूना देने से मुकरा आरोपी, कोर्ट ने भेजा जेल

कार्रवाई के दौरान जब एसीबी ने डिजिटल रिकॉर्डिंग से मिलान के लिए टीआई चन्द्रप्रकाश का वॉयस सैंपल (आवाज का नमूना) लेना चाहा, तो उन्होंने लिखित में स्वेच्छा से नमूना देने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी के कोटा (सोगरिया) स्थित निजी आवास और बारां पुलिस लाइन स्थित सरकारी आवास की भी नियमानुसार सघन तलाशी (सर्च) ली गई।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जयपुर के पुलिस अधीक्षक सुनील सिहाग के आदेशानुसार आरोपी उप निरीक्षक चन्द्रप्रकाश बैरवा (निवासी छोटा सोगरिया, लाडपुरा, कोटा) के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत एफआईआर संख्या 144/2026 दर्ज कर उसे विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है। माननीय विशिष्ट न्यायालय में पेश करने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है। इस गंभीर घूसखोरी प्रकरण की आगामी विस्तृत जांच झालावाड़ एसीबी की महिला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपर पुलिस अधीक्षक) डॉ. प्रेरणा शेखावत को सौंपी गई है।

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